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Noida News: जेल की चहारदीवारी में शिक्षा की नई राह

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- बिहार के कैदियों ने की सबसे अधिक पढ़ाई, पांच साल में 2193 बंदियों ने 10वीं और 12वीं के लिए कराया पंजीकरण
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- यूपी में 84 कैदी शिक्षा से जुड़े, एनआईओएस में कराया पंजीकरण


नेहा शर्मा
नोएडा। जेल की दीवारों के भीतर भी शिक्षा के माध्यम से भविष्य को संवारने की पहल रंग ला रही है। पिछले पांच वर्षों के दौरान देश भर की विभिन्न जेलों में हजारों कैदियों ने 10वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के लिए पंजीकरण कराया है। इस पहल में बिहार के कैदी सबसे आगे रहे, जहां 2193 बंदियों ने माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए पंजीकरण कराया। यह संख्या देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है।

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में दिल्ली के 967, हरियाणा के 898 और चंडीगढ़ के 768 कैदियों ने जेल में रहते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए आवेदन किया। उत्तर प्रदेश की जेलों में बंद 84 कैदियों ने भी 10वीं और 12वीं की शिक्षा के लिए पंजीकरण कराया। इसके अतिरिक्त, ओडिशा में 145, पंजाब में 28, झारखंड में 25, मध्य प्रदेश में 24, राजस्थान में 15, कर्नाटक में सात और उत्तराखंड में छह कैदियों ने शिक्षा को अपने जीवन का हिस्सा बनाया।
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रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक
जेल में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य कैदियों को समय का सदुपयोग करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की ओर प्रेरित करना है। पढ़ाई पूरी करने के बाद कैदियों के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ जाते हैं। संस्थान के अनुसार, शिक्षा बंदियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

जेल प्रबंधन का भी सहयोग
जेल प्रबंधक भी कैदियों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। जेलों में कैदियों को ओपन स्कूलिंग और अन्य बोर्डों के माध्यम से 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं से जोड़ा जा रहा है। इस पहल से उन व्यक्तियों को भी अपनी अधूरी शिक्षा पूरी करने का अवसर मिल रहा है, जिन्हें परिस्थितियों के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी थी।
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निशुल्क मिलती है शिक्षा
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान समाज के हर वर्ग तक शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से एनआईओएस की ओर से कारागारों में निरुद्ध लोगों को भी शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर की शिक्षा के माध्यम से उन्हें अपने जीवन को नई दिशा देने और समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिल रहा है। आर्थिक कठिनाई शिक्षा में बाधा न बने, इसके लिए कारावासियों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
प्रो. अखिलेश मिश्र, अध्यक्ष, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान
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पिछले पांच वर्षों में जेल में रहकर 10वीं और 12वीं की पढ़ाई के लिए पंजीकरण कराने वाले कैदियों की संख्या
राज्य
पंजीकृत कैदियों की संख्या
बिहार 2193
दिल्ली
967
हरियाणा 898
चंडीगढ़ 768
ओडिशा 145
उत्तर प्रदेश 84
पंजाब
28
झारखंड 25
मध्य प्रदेश 24
राजस्थान 15
कर्नाटक 7
उत्तराखंड 6
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