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Noida News: 95 लाख 89 हजार रुपये प्रतिदिन शहर की सफाई पर हुए खर्च

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स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-2025 में टॉप-23 शहरों में शामिल होने की उपलब्धि का दूसरा पक्ष यह भी
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पिछले वित्तीय वर्ष में जल, सिविल और विद्युत यांत्रिक की देखरेख से ज्यादा खर्च सफाई पर हुआ

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-25 के परिणाम में नोएडा ने सुपर स्वच्छ लीग में शामिल 23 शहरों के बीच पहुंचकर चमक बिखेरी है। इस चमक के पीछे नोएडा प्राधिकरण की मेहनत और तैयारी के साथ किया गया खर्च भी शामिल है। पिछले वित्तीय वर्ष में महज सफाई से जुड़े काम पर प्राधिकरण ने करीब 350 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस हिसाब से प्रतिदिन का खर्च 95 लाख 89 हजार रुपये हुआ है। यह खर्च सड़कों व अन्य निर्माण संरचनाओं की देखरेख, विद्युत व्यवस्था या पानी-सीवर की व्यवस्था पर किए गए खर्च से ज्यादा रहा है। यही नहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-026 के लिए 390 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट प्रस्तावित किया गया है। इसके पहले 2023-24 में यह बजट 277 करोड़ रुपये था। वहीं वित्तीय वर्ष 2022-23 में 238 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
आंकड़ों से स्पष्ट है कि सफाई पर यह खर्च लगातार बढ़ता ही जा रहा है। प्राधिकरण का सफाई व्यवस्था पर यह खर्च किसी स्वच्छताकर्मी की झाड़ू उठने से ही शुरू हो जाता है। कूड़ा कलेक्शन, गीले कूड़े के निस्तारण, सूखे कूड़े का निस्तारण, पहले से लगे
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कूड़े का निस्तारण और नाले की सफाई समेत कई काम शामिल हैं। नोएडा प्राधिकरण के पास नियमित कर्मचारियों की संख्या बहुत ही कम है। ऐसे में यह अधिकतर काम एजेंसियां ही करती हैं। सबसे ज्यादा खर्च कूड़े पर मैकेनिकल स्वीपिंग पर होता है। मैकेनिकल स्वीपिंग पर प्रति महीने 2.50 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आता है।
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नोएडा में जो कूड़ा खर्च और इंदौर में कमाई का जरिया

सुपर स्वच्छ लीग में शामिल होने के बाद बृहस्पतिवार को आयोजित समारोह में इंदौर के सवाल पर प्राधिकरण के महाप्रबंधक जन स्वास्थ्य एस पी सिंह ने मंच से कहा कि नोएडा अब इंदौर से पीछे नहीं बल्कि एक ही श्रेणी में शामिल है। दूसरी तरफ इंदौर का खर्च नोएडा के खर्च की तुलना में कम रहता है। फर्क नोएडा और इंदौर के बीच महज प्रबंधन का है। नोएडा को कूड़ा निस्तारण के लिए खर्च करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ इंदौर उसी कूड़े से कमाई करता है। एक में मिला हुआ गीला और सूखे कूड़े का नोएडा में सेक्टर-145 में बायोरेमिडेशन से निस्तारण होता है। प्रति मीट्रिक टन 774 रुपये अथॉरिटी को एजेंसी को देने होते हैं। यह बात जरूर है कि यह कूड़ा पिछले 10-12 साल पहले प्लानिंग न होने की समस्या है। सूखे कूड़े के लिए एमआरएफ सेंटर भी सही से शहर में नहीं चल पाए हैं। दूसरी तरफ इंदौर में गीले कूड़े के निस्तारण के लिए बायो सीएनजी प्लांट लगा हुआ है। इस प्लांट पर 17 हजार किलोग्राम गैस निकलती है जिसकी बिक्री होती है। इसी तरह सूखे कूड़े से भी इंदौर कमाई करता है। खास बात यह है कि ये प्लांट भी इंदौर ने पीपीपी मॉडल पर लगवाए हुए हैं।
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