इनेलो जिला कार्यकारिणी के इस्तीफे के बाद हुसैन की बढे़ंगी मुश्किलें
- इसी पार्टी के सहारे उन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव जीता था
नूंह। जिले में मजबूत मानी जाने वाली इनेलो पार्टी की जिला कार्यकारिणी द्वारा इस्तीफा दिए जाने से जहां इनेलो की फजीहत हुई है वहीं स्थानीय विधायक जाकिर हुसैन की भी मुश्किलें बढ़ेंगी। क्योंकि उन्होंने इसी टीम के सहारे कांग्रेस के पूर्वमंत्री आफताब अहमद को 34 हजार वोटों के अंतर से पटकनी देकर विधानसभा रण जीता था। अब इनेलो से अलग हुई कार्यकारिणी ने विधायक जाकिर हुसैन पर अनदेखी व तानाशाही का आरोप लगाकर यह संदेश भी दिया है कि कहीं न कहीं कार्यकर्ता विधायक के रवैये से आहत थे। जाकिर हुसैन व इनेलो को सीधे तौर पर इसका नुकसान होता नजर आ रहा है, लेकिन इसका फायदा फिलहाल कांग्रेस को न होते हुए दुष्यंत ग्रुप को होगा।
नूंह विधानसभा से बीते चुनावों में विधायक जाकिर हुसैन व पूर्वमंत्री आफताब अहमद में सियासी मुकाबला हुआ था। सियासी जानकार बताते हैं कि इससे पहले दोनों नेताओं के वालिद पूर्वमंत्री व सांसद मरहूम चौधरी तैयब हुसैन व पूर्वमंत्री एवं पूर्व सांसद खुर्शीद अहमद में भी मुकाबले हुए। दोनों परिवार सियासी तौर पर एक-दूसरे के धुरविरोधी हैं। पहली बार जाकिर हुसैन ने नूंह विधानसभा से इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ कांग्रेस के पूर्वमंत्री आफताब अहमद को 34 हजार से बड़ी पटकनी दी। जिसकी भरपाई अभी तक आफताब नहीं कर पाए थे लेकिन अब इनेलो के दो फाड़ होने व जिला कार्यकारिणी द्वारा पार्टी को छोड़ने के कारण इनेलो सहित विधायक जाकिर हुसैन को भी बड़ा झटका लगा है। अपने जमीन को खिसकने से बचाने के लिए जहां जाकिर हुसैन को एक बार फिर नए सिरे से मेहनत करने की जरूरत है। वहीं आफताब अहमद को भी अपनी खोई हुई जमीन तलाशने के लिए तेज प्रयास करना होगा।