नोएडा। कोरोना की दूसरी लहर के साथ ही जिले के 20 हजार उद्योगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पिछले चार महीने में 80 फीसदी तक बढ़ी कागज की कीमतों से कोरोगेटेड बॉक्स उद्योग बुरी तरह लड़खड़ा गया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश कोरोगेटेड बॉक्स मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन (यूपीसीबीएमए) की बैठक में जिले 800 उद्योगों में 8 दिन के लॉकडाउन का निर्णय लिया। 24 से 31 मार्च तक उद्योगों को बंद रखने पर सहमति बनी है।
यूपीसीबीएमए ने अपनी जनरल बॉडी की 20 मार्च को बैठक बुलाई है। सेक्टर-6 स्थित एनईए सभागार में होने वाली बैठक में उत्तर प्रदेश के साथ ही पड़ोसी राज्य राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल और पंजाब के कोरोगेटर भी शामिल होंगे। एसोसिएशन के सचिव एसके चौहान ने बताया कि सोमवार को पहले कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसके बाद देर शाम तक पदाधिकारियों ने बैठक कर आठ दिन तक उद्योगों को बंद रखने का निर्णय लिया है। 20 मार्च को जनरल बॉडी की बैठक में इसकी घोषणा की जाएगी। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों के उद्यमी भी बंद का समर्थन कर सकते हैं। हालांकि, हिमाचल में पहले ही इस कारोबार से जुड़े उद्यमियों ने इकाइयां बंद की हुई हैं।
चीन ने बंद किया रद्दी कागज का आयात
यूपीसीबीएमए के अध्यक्ष राजेंद्र भाटी ने बताया कि कोरोगेटेर को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। चीन ने एक जनवरी से किसी भी तरह के रद्दी कागज का आयात बंद कर दिया है। पेपर मिलें अच्छा कागज चीन को निर्यात कर रही हैं और कचरा भारत में सप्लाई किया जा रहा है। इससे भारतीय उद्योग धंधे चौपट हो गए हैं। पिछले चार महीने में हर तीसरे दिन कागज के दाम औसत 2 रुपये प्रति किलो बढ़े हैं। पेपर मिलों की गुटबंदी के कारण ऐसा हो रहा है। आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद नहीं है। जो कागज पिछले साल जून में 20 रुपये किलो था आज 44 रुपये भी नहीं मिल रहा है। इस स्थिति में यदि उत्पाद के दाम बढ़ाए जाते हैं तो उसे बेचने में समस्या पैदा होगी। यदि इस उद्योग को बचाना है तो सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना होगा।
उद्योगों पर ताला लगाकर प्रशासन को चाबी सौंपेंगे उद्यमी
वित्तीय वर्ष की समाप्ति के साथ ही सरकारी महकमों ने भी उद्यमियों पर आर्थिक बोझ बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसके विरोध में एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने मंगलवार को आपात बैठक बुलाई है। जिसमें 15 दिन तक उद्योगों को बंद रखने के फैसले पर सहमति बन सकती है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने बताया कि अपना रेवेन्यू टारगेट पूरा करने के लिए बिजली निगम ने पहले उद्योगों को ढाई गुना ज्यादा एडवांस के बिल भेजे और अब भुगतान नहीं करने पर कनेक्शन काटने शुरू कर दिए हैं। जीएसटी विभाग के 24 सचल दल दस्ते गाड़ियां रोककर जबरन दोगुना जुर्माना लगा रहे हैं। इसकी वजह से दिल्ली के व्यापारियों ने नोएडा में रॉ मैटेरियल भेजना बंद कर दिया है। कोरोना संकट की मार झेल रहे उद्योग बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। ऐसे में उद्यमी खुद ही अपने उद्योगों पर ताला लगाकर जिला प्रशासन को चाबियां सौंपने का मन बना चुके हैं।