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Noida News: वाहवाही लूटने के लिए खरीद लिए 76 इंटरसेप्टर, सड़कों पर नहीं उतार पाए

सार

लखनऊ में सड़क सुरक्षा के लिए खरीदे गए 76 इंटरसेप्टर वाहन आरटीओ सेंटर पर बेकार खड़े हैं। ड्राइवरों की कमी और स्टाफ की नियुक्ति न होने के कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे सरकारी धन और योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
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लखनऊ। मुख्यमंत्री से वाहवाही लूटने के लिए परिवहन विभाग ने इंटरसेप्टर वाहन खरीद तो लिए, लेकिन उन्हें सड़कों पर नहीं उतार पाए। इंटरसेप्टर ट्रांसपोर्टनगर स्थित आरटीओ के फिटनेस सेंटर पर खड़े कर दिए गए हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा को लेकर अफसरों की संजीदगी का अंदाजा लगाया जा सकता है।



इंटरसेप्टर वाहनों के जरिये ओवरस्पीडिंग करने वालों पर अंकुश लगाया जाता है। उनके चालान होते हैं। वाहन में एचडी कैमरे सहित कई उपकरण लगाए जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सड़क हादसों की संख्या पचास प्रतिशत तक कम करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत प्रदेशभर के लिए 76 इंटरसेप्टर वाहनों की खरीदारी की गई। परिवहन विभाग ने डीलर से 21 वाहन तत्काल ले लिए, जबकि शेष 55 वाहन यार्ड में खड़े कर दिए गए। बीते छह सितंबर को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में परिवहन विभाग व निगम की ओर से संयुक्त रूप से कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रहे। कार्यक्रम में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी मौजूद रहे। इस अवसर पर नई 400 बसों का शुभारंभ किया गया। जबकि सड़क हादसों को रोकने के लिए खरीदे गए 21 इंटरसेप्टर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हरी झंडी दिखवाकर रवाना कर दिया गया। उम्मीद थी कि ये इंटरसेप्टर जिलों में वितरित कर दिए जाएंगे। जहां सड़क हादसों को रोकने में अपना योगदान देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इंटरसेप्टर वाहनों को शहीदपथ के रास्ते ट्रांसपोर्टनगर स्थित फिटनेस सेंटर में लाकर खड़ा कर दिया गया। इंटरसेप्टर खुले में धूप, बारिश में पड़े हुए हैं। इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
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...ड्राइवर हैं नहीं, कौन चलाएगा

परिवहन विभाग के अधिकारी खुद बताते हैं कि हड़बड़ी में तथा वाहवाही लूटने के उद्देश्य से इंटरसेप्टर खरीद लिए गए। प्रत्येक इंटरसेप्टर पर विभाग ने 22 से 25 लाख रुपये खर्च किए हैं। ऐसे में 76 वाहनों पर 19 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। इंटरसेप्टर चलाने के लिए ड्राइवर ही नहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि संविदा चालकों के हाथों में इंटरसेप्टर दिए जाएंगे। इसके लिए भर्ती होनी है। यह प्रक्रिया कब तक शुरू होगी, इसकी जानकारी अफसरों के पास नहीं है।

पद मिल गया, जिम्मेदारी नहीं दी गई

ड्राइवरों की कमी के अतिरिक्त सड़कों पर वाहनों की चेकिंग के लिए स्टाफ व अफसरों की भी कमी है। प्रवर्तन की जिम्मेदारी संभागीय निरीक्षकों (आरआई) को सौंपने के उद्देश्य से उन्हें नया पद दिया गया है। आरआई को मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) बनाया गया है। उन्हें सड़क पर उतरकर वाहनों की तकनीकी जांच करनी है, लेकिन उन्हें सिर्फ पद दिया गया है, वाहन नहीं दिए गए हैं, न ही उनकी आईडी बनाई जा रही है। ऐसे में अभी भी आरआई ड्राइविंग लाइसेंस, वाहनों की फिटनेस से जुड़े कार्याें को ही निपटा रहे हैं।
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76 इंटरसेप्टर वाहन जिलों के लिए खरीदे गए हैं। ये सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में अहम योगदान देंगे। इंटरसेप्टर के लिए ड्राइवरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही इंटरसेप्टर जिलों में वितरित कर दिए जाएंगे।

-दयाशंकर सिंह, परिवहन मंत्री, उत्तर प्रदेश
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