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हेराल्ड हाउस खाली करने के मामले में फैसला सुरक्षित

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हेराल्ड हाउस खाली करने के मामले में फैसला सुरक्षित

सरकार ने 15 नवंबर तक खाली करने का आदेश दिया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने हेराल्ड हाउस खाली करने के मामले में केंद्र सरकार व नेशनल हेराल्ड प्रकाशन समूह एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। हाईकोर्ट ने फैसला आने तक केंद्र सरकार को आदेश प्रभावी न करने को कहा है।
केंद्र ने लीज की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए हेराल्ड हाउस 15 नवंबर तक खाली करने का निर्देश दिया था। एजेएल ने 12 नवंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस सुनील गौड़ के समक्ष सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एजेएल को समाचार पत्र प्रकाशन के लिए बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित जमीन लीज पर दी गई थी, लेकिन वहां पर 2008 से 2016 के बीच प्रकाशन बंद कर दिया गया। कंपनी ने इस इमारत की तीन मंजिल किराये पर दे दी थी, जिससे उसे 15 करोड़ रुपये किराया मिल रहा था। यह लीज की शर्तों का उल्लंघन है इसलिए कंपनी को हेराल्ड हाउस खाली करने का आदेश दिया गया था।
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एजेएल की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि केंद्र ने पहला नोटिस सितंबर 2016 में दिया था और उसके बाद अक्तूबर 2018 में इस मुद्दे को उठाया। मेहता ने सिंघवी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड व दूसरे पत्रों का प्रकाशन सरकार के नोटिस के बाद 2016 में दोबारा शुुरू किया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने पूछा कि जब एजेएल ने दोबारा प्रकाशन शुरू कर दिया था, तो फिर नोटिस देने की क्या जरूरत थी।
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