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692 किसानों को जेवर बांगर में मिला भूखंड

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जेवर तहसील में ड्रॉ के माध्यम से नगला छीतर गांव के विस्थापित किसानों को प्लॉट आवंटित करते अधिकार? - फोटो : Grnoida
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जेवर। नोएडा एयरपोर्ट से प्रभावित नंगला छीतर गांव के 692 किसानों को ड्रॉ के माध्यम से भूखंडों का आवंटन किया गया। ड्रॉ के दौरान जेवर तहसील के मुख्य हॉल और बाहर की ओर एलईडी लगाई गई, ताकि लाइव प्रसारण किया जा सके। प्रशासन ने किसानों के पहुंचने के बाद सेवानिवृत्त जज जेपी गुप्ता और आईएएस अधिकारी योगेंद्र नारायण के नेतृत्व में बनी टीम के सामने ड्रॉ की प्रक्रिया पूरी कराई।
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तहसील प्रशासन और प्राधिकरण की टीम ने नगला छीतर गांव के 692 प्रभावित परिवारों को जेवर बांगर में विस्थापित करने के लिए भूखंडों का आवंटन किया है। ग्रामीणों के सामने छोटे बच्चों से एक परिवार की पर्ची निकलवाते हुए 50 वर्गमीटर के 591, 60 वर्गमीटर के 45, 70 वर्गमीटर के 40, 80 वर्गमीटर के 17, 90 वर्गमीटर के 15 100 वर्गमीटर के 16 भूखंड आवंटित किए गए।
ज्यादातर किसानों को मौके पर ही आवंटन प्रपत्र भी सौंपते हुए जेवर बांगर में बसाई जा रही मॉर्डन टाउनशिप में मकान बनाने की अनुमति दे दी गई। यह जमीन भी एयरपोर्ट के पहले चरण के निर्माण के लिए जरूरी थी। यहां के किसानों को विस्थापित करने के बाद ही एयरपोर्ट का निर्माण शुरू हो सकता था। अब आगामी अप्रैल-मई में एयरपोर्ट की नींव रखी जा सकती है। मौके पर अपर जिलाधिकारी बलराम सिंह, यमुना प्राधिकरण के ओएसडी शैलेंद्र भाटिया, उपजिलाधिकारी जेवर व एयरपोर्ट प्रभारी रजनीकांत मिश्र, तहसीलदार विनय भदौरिया व जीत सिंह, नायब तहसीलदार बालेंदु भूषण आदि मौजूद रहे।
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447 भूखंडो के लिए 18 हजार फॉर्म बिके
यमुना प्राधिकरण की आवासीय भूखंड योजना लोगों को भा रही है। 447 भूखंडों की एवज में अब तक 18 हजार आवेदन बिके हैं। 12 हजार से अधिक आवेदन अब तक जमा भी हो चुके हैं। इस योजना में 30 मार्च तक आवेदन किए जा सकते हैं। होली पर अवकाश को देखते हुए बृहस्पतिवार को ही फॉर्म खरीदने और जमा करने वालों की भीड़ दिखी। बैंक की तरफ से परिसर के बाहर टेंट लगाकर फॉर्म दिए जा रहे थे।
आवेदनों की जांच करके जमा कराने के लिए अलग से टीम लगाई गई। बता दें कि इस योजना के तहत 60 वर्ग मीटर के 68, 90 वर्ग मीटर के 64, 120 वर्ग मीटर के 117, 300 वर्ग मीटर के 600, 500 वर्ग मीटर के 29, 1000 वर्ग मीटर के 75 और 4000 वर्ग मीटर के 11 भूखंड हैं। हालांकि पूछने पर यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने भूखंडों की संख्या बढ़ाए जाने के संकेत दिए हैं।
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