उच्च शिक्षण संस्थानों में विकलांगता की पढ़ाई के लिए पाठ्यक्रम के विकास पर वसंतकुंज स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न भागों से आए विशेषज्ञों ने विकलांगता अध्ययन में बी.ए. से लेकर पी-एच.डी. तथा पीजी डिप्लोमा की पढ़ाई पर जोर दिया।
सोसाइटी फॉर डिसेबिलिटी एंड रिहैबिलिटेशन स्टडीज (एसडीआरएस) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में सभी विश्वविद्यालयों में विकलांगता अध्ययन को शामिल करने, यूजीसी द्वारा इस पर शोध को बढ़ावा देने और केंद्र तथा राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण पदों पर दिव्यांगों की नियुक्ति की मांग की गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन सांसद मनोज तिवारी ने किया। उन्होंने मोदी सरकार द्वारा विकलांगों के सशक्तीकरण के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र किया। जेएनयू के विकलांगता अध्ययन विशेषज्ञ डॉ. जी एन कर्ण ने भारत सरकार से इसे मान्यता दिलवाने और पाठ्यक्रम की जरूरत को रेखांकित किया। सम्मेलन में जेएनयू के 10 मेधावी दिव्यांग छात्रों को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ईसीजीसी द्वारा तिपहिया स्कूटी और बैटरीचालित व्हील चेयर दी गई।