फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकार! भला ऐसे कैसे पढ़ेंगी और बढ़ेंगी बे टयां

विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार! भला ऐसे कैसे पढ़ेंगी और बढ़ेंगी बेटियां
विज्ञापन

रोशन लाल
होडल । केंद्र सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा बुलंद करने में लगी है, लेकिन कन्या स्कूलों की तरफ शायद उसका ध्यान नहीं है। यहां ग्रामीण व शहरी दोनों जगहों पर सरकारी कन्या स्कूलों में जरूरी सुविधाएं तक नहीं हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थिति ज्यादा बुरी है। होडल शहर स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इसका प्रमाण है। हल्की बारिश में स्कूल परिसर पानी से लबालब हो जाता है। पंप लगाकर पानी बाहर निकाला जाता है।
यह स्कूल मुख्य सड़क से करीब पांच फुट नीचे है। स्कूल को देखकर ऐसा लगता है कि मानो यह किसी बेसमेंट में चल रहा हो। पहले ही स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर काफी लड़कियों ने स्कूल छोड़ दिया है। वहीं कमरों की खस्ता हालत, खेल का मैदान न होना व बरसात में परिसर में जलभराव व कक्षाओं की छतों का रिसना उन्हें और अखरता है। वर्तमान में स्कूल में करीब 1350 छात्राएं हैं। सभी कमरों की हालत सही न होने की वजह से एक कमरे में 100-100 छात्राओं को बैठाया जाता है। ऐसे में शिक्षक भी पढ़ाई कराने में असमर्थ नजर आते हैं।
विज्ञापन

सीलन, मक्खी-मच्छरों से बीमारियां फैलने का खतरा
स्कूल के अंदर बरसात के पानी व बाहर नालियों से रिसकर अंदर आने वाले गंदे पानी के कारण हर समय बदबू उठती रहती है। मक्खी-मच्छर का प्रकोप रहता है। इन हालात में छात्राओं के बीमार पड़ने की आशंका बनी रहती है। बार-बार शिकायत के बाद भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पानी भरा होने के कारण स्कूल भवन की दीवारों में भी दरारें आनी शुरू हो गई हैं। कमरों में दीवारों पर जगह-जगह सीलन आकर पपड़ी सी बनने लगी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि स्कूल पर ध्यान दिया जाए।
विज्ञापन

----------
इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी सुमन नैन का कहना हैकि स्कूल की समस्या का जल्द समाधान कराया जाएगा । सरकार को प्रस्ताव भेजकर लिखा जाएगा। सरकारी स्कूलों में जहां भी इस तरह की कमियां हैं, वहां जल्द समाधान कराए जाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें