हेडिंग: आरटीआई को हथियार बना समाज को दिशा देने में जुटे
महज 29 वर्ष की उम्र में युवाओं के प्रेरणा स्रोत बने रंजन तोमर
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। महात्मा गांधी ने कहा था ‘यदि हम सब अपने कर्तव्यों का पालन करें तो अधिकारों को खोजने के लिए हमें दूर नहीं जाना पड़ेगा’। कुछ इसी धारणा के साथ युवाओं की सोच बदलने में जुटे हैं रंजन तोमर। उन्होंने आरटीआई का सदुपयोग कर समाज हित से जुड़ी कई अहम जानकारियों को ही जन-जन तक नहीं पहुंचाया, बल्कि युवाओं के उत्थान के लिए किए जा रहे कार्याें के लिए उन्हें ‘यूथ लीडर ऑफ इंडिया‘ के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
जिले के ग्राम रोहिल्लापुर में रहने वाले 29 वर्षीय रंजन दिल्ली हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। साथ ही आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। गृह मंत्रालय से आरटीआई के तहत आतंकवाद से निपटने में मोदी और मनमोहन के तीन-तीन साल के प्रयासों का जवाब मांगकर रंजन चर्चा में आए थे। राष्ट्रपति के पद संभालने के बाद उनके नाम से चल रहे फर्जी फेसबुक पेज का मामला उन्होंने ही उठाया। हाल ही में उन्होंने ग्रह मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया आदि से आरटीआई के जरिये पूछे गए सवालों के जवाब से जन-जागरूकता लाने का काम किया है। इसके अलावा सूचना के अधिकार पर रंजन की लिखी पुस्तिका भी इन दिनों चर्चा में है। रंजन का कहना है कि सही मायने में आजादी तो तब होगी, जब हम देश के, समाज के गलत तत्वों के उत्पीड़न से मुक्त हो जाएं।
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ये हैं इनकी उपलब्धियां
- शहरी क्षेत्र के उत्थान के लिए आरडब्ल्यूए तमाम हैं, लेकिन रंजन ने ग्रामीण क्षेत्र की आवाज उठाने के लिए नोएडा विलेज रेजिडेंट एसोसिएशन बनाई।
- वर्ल्ड यूथ कॉफ्रेंस-2016 में उन्हें सामाजिक बदलाव में भूमिका निभाने के लिए वर्ल्ड यूथ लीडर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
- नई दिल्ली में इंडियन यूथ फोरम की तरफ से 2017 में यंग लीडर अवार्ड दिया गया। इसी वर्ष इंडिया यूथ फाउंडेशन ने दिल्ली यूथ अवार्ड से नवाजा।
- दिसंबर-2017 में जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से सर्वश्रेष्ठ युवा समाजसेवी अवार्ड से नवाजा गया।
- फरवरी-2018 में राष्ट्रीय स्तरीय सम्मान समारोह में समाज सेवा के लिए इंडियन आइडल अवार्ड से सम्मानित किया गया।