इलिजारोव तकनीक के जरिये मेवात के अस्पताल में हुई अनोखी सर्जरी
- 4 घंटे चले ऑपरेशन में पैर से काटकर निकाली खराब हड्डी
अमर उजाला ब्यूरो
नगीना। देश के बड़े अस्पतालों में इलिजारोव तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन छोटे सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक होने के बावजूद भी इस प्रकार की सर्जरी संसाधनों के अभाव में नहीं की जाती। कुछ चिकित्सक जानबूझकर भी मरीजों को मेडिकल कॉलेज व अन्य बड़े अस्पतालों में भेज देते हैं। निजी अस्पतालों इस सर्जरी का 2 से 3 लाख रुपये लेते हैं।
सोमवार को जिला अस्पताल मांड़ीखेड़ा अल-आफिया में पहली बार इलिजारोव तकनीक के जरिये फिरोजपुर झिरका के मरीज असगर (50) की गली हुई हड्डी का सफल ऑपरेशन 4 घंटे में किया गया। सड़क दुर्घटना में 4 महीने पहले असगर के पैर की हड्डी टखने तक पूरी तरह खराब हो गई थी। इलाज कराने के लिए उसने नल्हड़ मेडिकल कॉलेज से लेकर एम्स तक चक्कर काटे, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। थक-हारकर पिछले महीने वह मांड़ीखेड़ा के सरकारी अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नसीम अहमद को दिखाने आया। इसके बाद उसके पैर का एक्सरे व जरूरी जांच कराई गई, तब जाकर चिकित्सक किसी नतीजे तक पहुंचे। अमर उजाला से बातचीत में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नसीम अहमद ने बताया कि करीब 4 घंटे का वक्त ऑपरेशन में लग गया। जो खराब हड्डी निकाली गई है हरेक दिन एक मिलीमीटर के हिसाब से दो महीने तक बढ़ाना पड़ेगा। तब जाकर हड्डियों के बीच का फासला भर पाएगा।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन करने वाली टीम में बेहोशी के चिकित्सक पी तनेजा, प्रदीप कुमार, रजा अहमद, नवीन ऑपरेशन थियटेर टेकभनीशियन शामिल रहे।
फोटो-मांड़ीखेड़ा अस्पताल में मरीज असगर के साथ विशेषज्ञ डॉ. नसीम व टीम।