सेक्टर-6 में चल रहा था ठगों का कॉल सेंटर, बैंक से लोन दिलाने, कम समय में बीमा पॉलिसी मेच्योर कराने और रियल एस्टेट में निवेश से मुनाफे के नाम पर ठगी करते थे
माई सिटी रिपोर्टर,
नोएडा। किसी भी बैंक से लोन दिलाने, कम समय में बीमा पॉलिसी मेच्योर कराने और रियल एस्टेट में निवेश से मुनाफे के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। फेज-1 थाना पुलिस ने शुक्रवार को सेक्टर-6 में चल रहे ठगों के कॉल सेंटर छापा मारा। कॉल सेंटर के संचालक अनुज, राकेश कुमार, मनीष मंडल, शुभम सक्सेना और शहजाद अहमद को गिरफ्तार भी किया। पुलिस के मुताबिक, करीब छह महीने से चल रहे इस कॉल सेंटर से अब तक विभिन्न राज्यों और जिलों के 500 लोगों से ठगी हुई है।
एडीसीपी नोएडा शैव्या गोयल ने बताया कि कॉल सेंटर के बारे में सूचना मिली थी। पुष्टि के बाद पुलिस ने सेक्टर-6 के प्लॉट नंबर डी-16 पर बनी इमारत में छापा मारा। भंगेल निवासी अनुज गिरोह का सरगना है। राकेश कुमार मूलरूप से झारखंड के हजारीबाग का रहने वाला है और वर्तमान में दिल्ली के उत्तर नगर में रह रहा था। मनीष मंडल बिहार के मधुबनी का है। वह न्यू अशोक नगर में रह रहा था। शुभम सक्सेना दिल्ली के लक्ष्मी नगर जबकि शहजाद जामिया नगर का निवासी है। आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी पुलिस खंगाल रही है। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों से शिकायतें पहले से ही एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर दर्ज हैं।
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फर्जी दस्तावेज से दिलाते थे भरोसा
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी कॉल सेंटर के माध्यम से आम नागरिकों को फोन कर खुद को बीमा कंपनी, बैंक या निवेश सलाहकार का प्रतिनिधि बताते थे। आकर्षक स्कीम समझाई जाती थी। भरोसा दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया जाता था। पांच हजार से एक लाख रुपये तक का निवेश कराते थे। ठगी से प्राप्त रकम को फर्जी और किराये के बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था। बाद में इस धनराशि को निकालकर आपस में बांट लिया जाता था।
ये लालच देते थे
-फोन पर लोगों को नोएडा से दिल्ली, मुंबई तक रियल एस्टेट में निवेश करने पर मोटे मुनाफा
-बीमा पॉलिसी को कम समय में मेच्योर करवाकर लाभ समेत धनराशि वापसी
-किसी भी बैंक से बगैर दौड़भाग के लोन करवाने
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चार बैंक खाते फ्रीज, जमा हैं 80 लाख रुपये
पुलिस को लैपटॉप से कॉल डाटा शीट, पीड़ितों की जानकारी और लेनदेन से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, 16 मोबाइल फोन, एक प्रिंटर मशीन और 45 कॉल डाटा शीट बरामद की गई है। पुलिस ने चार बैंक खातों को फ्रीज करवाया है जिनमें 80 लाख रुपये जमा होने की बात सामने आ रही है।
कई राज्यों के लोगों से हुई ठगी
ठगी का यह नेटवर्क केवल नोएडा तक सीमित नहीं था। इस कॉल सेंटर के जरिये कई राज्यों के लोगों को ठगा गया है। एसीपी स्वतंत्र सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपी स्नातक पास हैं। उनकी आयु 20 से 35 साल के बीच है।
पुलिस की सलाह रखें ध्यान-
- बीमा पॉलिसी, निवेश या लोन से संबंधित किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या ई-मेल पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
-कोई भी व्यक्ति यदि खुद को बैंक या बीमा कंपनी का अधिकारी बताकर धनराशि की मांग करता है, तो उसकी जानकारी संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यम से जरूर सत्यापित करें।
- ओटीपी, बैंक खाता विवरण, एटीएम या डेबिट-क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। साइबर ठगी की आशंका होने या धनराशि ट्रांसफर हो जाने की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।