नोएडा (संदीप वर्मा)। जिले के अस्पतालों में बेड मिलना तो परेशानी का सबब बना ही है, यदि किसी दूसरे शहर के बेड का इंतजाम हो भी जाए तो लाइफ सपोर्ट पर निजी एंबुलेंस में वहां तक पहुंचाना आसान नहीं है। उसके लिए दो या तीन गुनी तक कीमत चुकानी पड़ रही है। एक ऐसे ही मामले में शहर के जीएल बजाज कॉलेज में निदेशक मंजू खत्री को मथुरा के केडीसी अस्पताल तक ले जाने के लिए एंबुलेंस का किराया 50 हजार वसूला गया।
नॉलेज पार्क स्थित जीएल बजाज कॉलेज में उपाध्यक्ष अनिल खत्री ने बताया कि उनकी पत्नी मंजू खत्री (57 वर्ष) कॉलेज में प्लेसमेंट सेल की निदेशक हैं। उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर एक अस्पताल में भर्ती कराया था। लेकिन अस्पताल प्रशासन रेमडेसिविर इंजेक्शन और अन्य चीजों का इंतजाम करने के लिए दबाव डाल रहा था। उन्होंने अन्य जगह प्रयास किए तो मथुरा के केडीसी अस्पताल में बेड का इंतजाम हो गया। फिर अनिल ने पत्नी को मथुरा ले जाने का इंतजाम शुरू किया। एक अस्पताल की लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस ने समय अधिक लगने का हवाला देकर जाने से मना कर दिया।
इसके बाद ग्रेटर नोएडा में एंबुलेंस चलवाने वालों से बात की गई। उन्होंने छोटे वेंटिलेटर और एक अटेंडेंट युक्त एंबुलेंस से मरीज को मथुरा ले जाने के 50 हजार रुपये मांगे। मरीज की जान बचाने के लिए उन्होंने हामी भर दी। अनिल खत्री का कहना है कि ऐसे कठिन समय में लोगों को मरीजों का फायदा नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने बताया कि मथुरा में उनकी पत्नी का अच्छा उपचार चल रहा है और अभी हालत स्थिर है।