खरीदारों ने बताया कि वर्ष 2010 में बिल्डर ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एक साथ कई प्रोजेक्ट शुरू किए थे। सभी में तीन वर्ष बाद कब्जा देने का वादा किया था, लेकिन सभी खरीदारों को कब्जा नहीं दिया।
सुपरटेक के 16 प्रोजेक्ट में करीब 50 हजार खरीदारों का 14 वर्ष का वनवास खत्म होगा। खरीदारों को उम्मीद है कि अब उनको फ्लैट मिल जाएगा। हालांकि अभी तीन वर्ष इंतजार करना होगा। सबसे अधिक खरीदार नोएडा और ग्रेटर नोएडा के प्रोजेक्टों में फंसे हैं। वहीं इन प्रोजेक्ट में जिनको कब्जा मिल चुका है, वो खरीदार मालिकाना हक और मूलभूत सुविधाएं मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
विज्ञापन
खरीदारों ने बताया कि वर्ष 2010 में बिल्डर ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एक साथ कई प्रोजेक्ट शुरू किए थे। सभी में तीन वर्ष बाद कब्जा देने का वादा किया था, लेकिन सभी खरीदारों को कब्जा नहीं दिया। काफी इंतजार करने के बाद वर्ष 2019 में ग्रेनो वेस्ट के इको विलेज-3 के खरीदारों ने एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी।
वर्ष 2021 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने बिल्डर के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील की। जिस पर बिल्डर के खिलाफ दिवालिया की कार्रवाई शुरू की। बैंक के साथ 11 प्रोजेक्ट के खरीदारों ने भी अपनी शिकायत दी। वहां तीन साल लड़ने के बाद अब खरीदारों के पक्ष में आदेश आया हैं। सुपरटेक बिल्डर के ज्यादातर प्रोजेक्ट में काफी फ्लैटों का निर्माण हो चुका हैं, लेकिन वहां अभी संबंधित प्राधिकरण से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट व कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला हैं।