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और गहरा होगा कृषि संकट : नीतीश

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और गहरा होगा कृषि संकट : नीतीश
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- केंद्र की वादाखिलाफी से किसान कर रहे आंदोलन
- यूपी के साथ चाहे तो कल ही करा लें बिहार में चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र की मोदी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र संकट से गुजर रहा है और इसके पीछे मुख्य समस्या है कि लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन मूल्य में वृद्धि नहीं हो रही है। केंद्र अगर कोई ठोस पहल नहीं करता है तो कृषि में आगे और समस्याएं आ सकती हैं।
सोमवार को लोक संवाद के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों से जो वादा किया गया था, वो पूरा नहीं किया। चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि फसल के उत्पादन मूल्य पर पचास प्रतिशत मुनाफा दिलाएंगे, लेकिन केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्ष में इस दिशा में कुछ भी नहीं किया। इसी का परिणाम है कि आज देश के अलग-अलग राज्यों में किसान आंदोलन कर रहे हैं। किसानों के लिए केंद्र सरकार अब तक कोई राष्ट्रीय नीति नहीं ला पाई है। उन्होंने किसानों की खुदकुशी का कारण बताते हुए कहा कि किसानों के उत्पादन मूल्य में बढ़ोतरी तो हो रही है, लेकिन समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी नहीं होना बड़ा कारण है।
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नीतीश कुमार ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के योग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन्हें कृषि समस्या का निदान करना है वो योग कर रहे हैं। एम सीड को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कहा कि सरसों और बैगन के जीएम सीड को लेकर हमने विरोध किया है, लेकिन इसे लगातार प्रमोट किया जा रहा है।
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गांधी पर दिए बयान पर नीतीश ने कहा कि वो कुछ कुछ बोलते रहते हैं, मैं इस पर ध्यान नहीं देता कि कौन क्या बोल रहा है। रविवार को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर उन्होंने कहा कि हम चुनौती स्वीकार करते हैं, बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी चुनाव एक साथ कराए जाएं, तो मैं बिहार में चुनाव कराने को तैयार हूं। साथ ही कहा कि दोनों राज्यों के सांसद और विधायक इस्तीफा देकर चुनाव में उतरे, तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। मालूम हो कि मौर्य ने रविवार को नीतीश कुमार की तुलना अखिलेश यादव से करते हुए चुनाव कराने की चुनौती दी थी।
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