मौसम: पुरवा हवा ने बढ़ाई उमस, अभी तीन दिन और गर्म रहेगा मौसम
एक अक्तूबर को हो सकती बूंदाबांदी, लौटते मानसून के वक्त हर बार रहती है ऐसी स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सितंबर के आखिरी सप्ताह में आमतौर पर गर्मी कम होने लगती है लेकिन इस बार पूर्वांचल में कम बारिश और समय से पहले लौट रहे मानसून की वजह से तेज धूप और शुष्क मौसम ने लोगों को बेहाल कर रखा है। सितंबर में मई-जून वाली गर्मी-उमस का अहसास हो रहा है। शनिवार को तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इतना तापमान मई-जून में होता है।
दिन में धूप चुभन पैदा कर रही है और रात में भी उमस से लोगों को राहत नहीं मिल रही। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन दिन तक गर्मी से निजात मिलना मुश्किल है। शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक दर्ज किया गया। पूर्वा हवाओं के चलते उमस बढ़ गई है। हालांकि, एक अक्तूबर को बूंदाबांदी होने की संभावना जताई जा रही है।
मौसम का यह रुख आम लोगों को असामान्य लग रहा है। दोपहर में सूरज की तपिश इतनी बढ़ जा रही है कि लोग पसीने से तरबतर हो जाते हैं। शनिवार को तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इतना तापमान मई-जून में दर्ज होता है। इस बार 10 जून के आसपास भी लगभग इतनी ही गर्मी थी।
मौसम विभाग के अनुसार सितंबर में आमतौर पर तापमान 32 डिग्री के आसपास रहता है। बारिश के कारण पर्याप्त नमी रहती है। सुबह के समय हल्की शीत का असर रहता है, लेकिन इस बार अभी शीत का असर नहीं दिख रहा है। इसीलिए धूप तीखी लग रही है। यह स्थिति न सिर्फ इंसानों बल्कि पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों के लिए भी हानिकारक साबित हो रही है। धूप के चलते खेतों की नमी कम हो रही है और पौधों की वृद्धि पर असर पड़ रहा है।
कालानमक की पैदावार पर पड़ेगा असर
महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र, चौक माफी के अध्यक्ष और वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि इस समय मौसम इतना गर्म नहीं होना चाहिए। लगातार तेज धूप से धान की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। खासकर काला नमक धान, जिसकी खुशबू विश्व प्रसिद्ध है, वह प्रभावित होगा। इसके अलावा अगैती फसलों को भी नुकसान पहुंचेगा। खेतों में नमी घटने से बीजों का अंकुरण सही से नहीं हो पाएगा।
जलवायु परिवर्तन का असर
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डीके सिंह ने बताया कि पिछले 40 वर्षों में आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) करीब 4 प्रतिशत बढ़ चुकी है। इसके चलते सूर्य की पराबैंगनी किरणें अधिक प्रभाव डाल रही हैं और धरती का तापमान बढ़ा रही हैं। जनसंख्या वृद्धि, प्रदूषण और पेड़ों की कटाई की वजह से यह समस्या और गहराएगी। यदि समय रहते पौधरोपण और प्रदूषण नियंत्रण पर जोर नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संकट और गहराएगा।
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किसान बोले-इस बार सितंबर में ठंड की आहट नहीं
रायपुर गांव के निवासी पलटू राम साहनी का कहना है कि कुआर (आश्विन मास) के दूसरे पखवारा में नवरात्र आता है। इस पखवारे में हस्त नक्षत्र की बारिश होती है, जिसके साथ ही हल्की ठंडक शुरू हो जाती है। इस बार धूप असामान्य रूप से तेज है। 20 साल पहले जब हम लोग नवरात्र में रामलीला देखने जाते थे तब रात में ठंड लगती थी, जिसके लिए हल्की चादर साथ रखनी पड़ती थी। अब तो पसीने छूट रहे हैं। जंगल कौड़िया के किसान भुआल जायसवाल ने कहा कि सितंबर-अक्टूबर में दिन में गर्मी का असर पहले भी रहता था, लेकिन सुबह की शीत से फसलों को पर्याप्त नमी मिलती थी। वह इस बार अलग है। तेज धूप और गर्म हवाएं धान और सब्जियों की फसलों को बुरी तरह प्रभावित करेंगी।
लौटते मानसून की वजह से है ऐसा मौसम
मौसम विशेषज्ञ मोहम्मद दानिश ने बताया कि लौटते मानसून के समय ऐसी स्थिति अक्सर बनती है। हालांकि इस बार गर्मी कुछ अधिक बढ़ी हुई है। ऐसा पुरुवा हवा के प्रभाव से हो रहा है। अभी तीन दिन तक यही हालत रहेगी।