बिजनौर। अमानगढ़ में इस बार जंगल सफारी का रोमांच बढ़ने वाला है। 35 किलोमीटर लंबे जंगल सफारी की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। वहीं नवंबर के पहले सप्ताह में ही पर्यटन सत्र शुरू होने की संभावना भी जताई जा रह है। रास्ते लगभग तैयार हो चुके हैं, वहीं पर्यटकों के लिए फीस में कोई बढ़ोतरी भी इस बार नहीं की जा रही है।
अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में केहरीपुर वन चौकी और बुकिंग सेंटर इस बार और भी आकर्षक नजर आएंगे। केहरीपुर में पर्यटकों को देशी अंदाज में बना कैफेटेरिया, बच्चों के खेलने के लिए मिनी पार्क लगभग तैयार हो चुके हैं। वहीं अमानगढ़ के अंदर के रास्ते अन्य सालों के मुकाबले मजबूत तरीके से तैयार किए जा रहे हैं।
अमानगढ़ रेंजर अंकिता किशोर ने बताया कि आने और जाने के लिए पर्यटक 35 किलोमीटर लंबी सफारी करेंगे। साथ ही जंगल में वॉटर हॉल तक जाने के लिए भी रास्ते बनाए हैं, जहां पर सबसे ज्यादा वन्य जीवों के देखे जाने की संभावना रहती है।
17 किलोमीटर जाना और आने की दूरी होगी 18 किलोमीटर
अमानगढ़ में आने और जाने सहित जंगल सफारी का ट्रैक करीब 35 किलोमीटर निर्धारित है। इसमें करीब 17 किमी जाना और 18 किमी वापिस लौटना शामिल है। इसमें खास बात अमानगढ़ के घने जंगल हैं। यहां पर जंगल सफारी की सड़क के दोनों ओर पुराने बड़े पेड़ तो नजर आते ही हैं, साथ ही सर्दियों के समय जंगल में उठती धुंध पर्यटकों को खूब आकर्षित करती है।
कई क्षेत्र पर्यटकों के लिए रहेंगे बंद
अमानगढ़ रेंज कभी कार्बेट पार्क का ही हिस्सा हुआ करती थी। अमानगढ़ रेंज का रकबा 9500 हेक्टेयर है। इसमें करीब 8600 हेक्टेयर क्षेत्र टाइगर रिजर्व के तहत आता है। साल 2012 में अमानगढ़ वन रेंज को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला। पर्यटन के दौरान फक्कड़ चौराहे से दोनों ओर का रास्ता पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। झिरना गेट तक जिप्सी जाएगी और वहीं से लौटना होगा।
सफारी के के लिए देनी होगी 2280 रुपये फीस
इस बार भी वन विभाग ने फीस में कोई बदलाव नहीं किया है। सफारी के लिए एक जिप्सी में पांच लोगों को जाने की अनुमति होगी। इसके लिए पर्यटकों को 2280 रुपये फीस देनी होगी। इसमें एक गाइड के लिए 400 रुपये और प्रति पर्यटक 200 रुपये फीस अलग से देनी होगी।
- अमानगढ़ में दुर्लभ गिद्ध दिखना भी आसान
जिले में किसी भी स्थान पर गिद्ध नजर नहीं आते हैं, जबकि अमानगढ़ में इनके बड़े झुंड दिखाई देते हैं। कई बार यहां पर वन अधिकारी और पर्यटक एक साथ 100 से ज्यादा की संख्या में गिद्ध एक साथ देख चुके हैं। इसका बड़ा कारण यहां का घना जंगल और उनके प्राकृतिक आवास बेहतर होना है।
अमानगढ़ एक नजर में
बाघ 32
गुलदार 45
हाथी 105
चिकारा 06
काला हिरन 50
सांभर 226
बारहसिंगा 37
भालू 9
मोर 1074
शासन की ओर से जुलाई माह में एक पत्र आया था, जिसमें एक नवंबर से पर्यटन सत्र प्रस्तावित है। सभी तैयारी पूरी हो चुकी है। उच्चस्तर से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार पर्यटन सत्र का शुभारंभ किया जाएगा।
-अंशुमान मित्तल, एसडीओ, अमानगढ़