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बिल्डर समेत छह नामजद के खिलाफ 35 करोड़ की धोखाधड़ी का केस दर्ज

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ग्रेटर नोएडा। कॉरनॉस्टी मैनेजमेंट इंडिया कंपनी फिल्म सिटी (नोएडा) की ओर से सूरजपुर कोतवाली में नोएडा के सेक्टर-90 के प्लॉट संख्या 1, 2 और 3 की 1.2 लाख वर्गमीटर भूमि की एवज में करीब 35 करोड़ की धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज कराया गया है। आरोप है कि बिल्डर और उसके साथियों ने मिलकर धोखाधड़ी कर रकम हड़प ली। न्यायालय के आदेश पर कंपनियों के निदेशकों, भूटानी ग्रुप समेत छह नामजद व अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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कॉरनॉस्टी मैनेजमेंट इंडिया प्राईवेट लिमिटेड फिल्म सिटी के प्रतिनिधि प्रदीप कुमार शुक्ला ने शिकायत में बताया कि कंपनी की एक सहायक कंपनी सीबीएस प्रोजेक्ट प्राईवेट लिमिटेड बनाकर वर्ष 2007 में नोएडा के सेक्टर-90 में प्लॉट-1 करीब एक लाख वर्ग मीटर का नोएडा प्राधिकरण से आवंटित कराया गया था, जिसकी कीमत करीब 50.90 करोड़ रुपये थी। आवंटन के बाद वर्ष 2008 में इसमें 2949 वर्ग मीटर और जुड़ गया था। इसकी अलग से कीमत करीब 49 लाख रुपये और जोड़ी गई थी। यह आवंटन कंपनी के एमडी राजेश मलिक के नाम पर था। मुख्य कंपनी कॉरनॉस्टी सहायक कंपनी की ओर से प्राधिकरण को लगभग 17.9 करोड़ रुपये जमा कराए गए। बाकी बचे 35.67 करोड़ रुपये छमाही किश्त में 2015 तक जमा कराने थे। वहीं, 9.58 करोड़ रुपये और भूमि की कीमत 32.40 करोड़ रुपये सहायक कंपनी की ओर से लीज डीड के हिसाब से कॉरनॉस्टी कंपनी की ओर से चुकाए गए।
आरोप है कि बाद में प्रॉपर्टी डीलर संजय रस्तोगी ने संपर्क कर उक्त भूमि को और अच्छे दाम पर बिकवाने का सब्जबाग दिखवाया। वहीं, सहायक कंपनी सीबीएस प्रोजेक्ट प्राईवेट लिमिटेड में स्वयं निदेशक बनने और अपने बेटों ईशान रस्तोगी, वासु रस्तोगी और पत्नी मीनू रस्तोगी को कंपनी में नौकरी के नाम पर निदेशक बनवा दिया। आरोपियों ने भूटानी ग्रुप के आशीष भूटानी से मिलकर 8.3 करोड़ रुपये का भुगतान कराया। वहीं, 42.35 करोड़ रुपये के भुगतान का वादा किया।
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आरोप है कि आरोपियों ने कूट रचित और धोखाधड़ी करते हुए तीसरे पक्ष आशीष भूटानी के साथ मिलकर तीसरे पक्ष भूटानी ग्रुप को जमीन का हस्तांतरण कर दिया। आरोप है कि इस भूमि को बिल्डर ने फ्लैट बनाकर एक हजार करोड़ रुपये गलत तरीके से बनाए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि इस भूमि पर फ्लैट मालिकों को कोई धोखाधड़ी व परेशानी होती है तो इसकी जिम्मेदार उनकी कंपनी न होकर यह आरोपी हैं। मामले की शिकायत कंपनी ने नवंबर 2020 में सूरजपुर कोतवाली में की थी। यहां मामला दर्ज न होने पर पहले कमिश्नर दफ्तर में भी शिकायत की, लेकिन यहां भी सुनवाई न होने पर न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
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