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एनसीआर में हाइड्रोजन-सीएनजी से बसें चलाने की योजना

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एनसीआर में हाइड्रोजन-सीएनजी से बसें चलाने की योजना
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फरीदाबाद। दिल्ली-एनसीआर में निरंतर खराब होती हवा को बचाने के लिए दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हाइड्रोजन-सीएनजी (एच-सीएनजी) से बसें चलाने की योजना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पहले चरण में फरीदाबाद स्थित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (अनुसंधान एवं विकास केंद्र) दिल्ली, राजघाट पर एच-सीएनजी डिपो से जून 2019 में 50 बसों पर प्रयोग शुरू किया जाएगा। इसके लिए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने तैयारी शुरू कर दी है। प्रयोग सफल रहा और प्रदूषण में कमी आई तो इसे बड़े पैमाने पर लागू करने का निर्णय लिया जा सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को बढ़ाने में सबसे अधिक योगदान गाड़ियों का है। दिल्ली-एनसीआर में निरंतर खराब होती हवा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) को अत्यधिक स्वच्छ ईंधन के तौर पर हाइड्रोजन फ्यूल की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया था। विशेषज्ञों के सुझाव पर विकल्प स्वरूप हाइड्रोजन-सीएनजी पर विचार किया गया। स्वच्छ ईंधन मानी जाने वाली सीएनजी में अगर हाइड्रोजन मिला दी जाए तो वह और भी ज्यादा स्वच्छ हो जाएगी।
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इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली में भारत स्टेज (बीएस)-4 मानक की 50 सीएनजी बसों को प्रयोग के तौर पर एच-सीएनजी पर चलाया जाएगा। इसके लिए राजघाट स्थित दिल्ली परिवहन विभाग के डिपो पर उत्पादन एवं वितरण केंद्र तैयार किया गया है। जून 2019 में इन बसों को एच-सीएनजी ईंधन पर चलाया जाएगा। यदि प्रयोग सफल होता है तो उसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकता है। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण में कमी लाने के प्रयास के लिए इस प्रयोग पर गंभीरता से प्रयास किया जा रहा है। सीएनजी में मिथेन मुख्य गैस है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, सीएनजी से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पीएम का उत्सर्जन होता है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की तुलना में यह काफी कम है। अब सीएनजी और हाइड्रोजन को मिलाकर हाइड्रोजन सीएनजी लाई जा रही है। बताया जा रहा है कि सीएनजी में 18 फीसदी तक हाइड्रोजन की मात्रा रहेगी। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन 70 फीसदी तक कम होगा। इसके अलावा इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के अनुसंधान एवं विकास केंद्र में हाइड्रोजन से बसें चलाने पर भी प्रयोग चल रहा है। अनुसंधान केंद्र में टाटा मोटर्स के सहयोग से हाइड्रोजन ईंधन पर दो बसें चलाई भी जा रही हैं।
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