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बीमारी से ज्यादा अस्पताल से डरते है मरीज ।

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अस्पताल जाने से डरते हैं मरीज
नोएडा सेक्टर-57 की ईएसआई डिस्पेंसरी का बुरा हाल
लाल सिंह
नोएडा। शहर के किसी भी सरकारी अस्पताल का हाल ठीक नही हैं। कुछ मरीज तो सरकारी अस्पताल जाने के बजाय घरेलू उपचार लेना बेहतर समझते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा सोमवार को सेक्टर-24 के ईएसआई अस्पताल में दिखा। यहां मरीजों के पर्चा लेने के लिए लंबी लाइन थी। खडे़ होने की ठीक व्यवस्था न होने के कारण लोगों को धूप में खड़ा रहना पड़ा। यहां ईंट, बालू-गिट्टी का अंबार लगा है। लाइन में लगे सुमित ने बताया कि गार्ड मरीजों से धक्का-मुक्की करते हैं। अपने जानने वालों को तुरंत अंदर भेज देते हैं। कुछ कहने पर मरीजों से बदतमीजी करते हैं। हालांकि, अस्पताल के नए डायरेक्टर ने दौरा कर गिट्टी, बालू और अन्य सामान को हटवाने, लावारिस कुत्तों को बाहर निकालने के निर्देश दिए हैं।
सबसे बुरा हाल सेक्टर-57 की ईएसआई डिस्पेंसरी का है। यहां मरीजों को पीने का साफ पानी भी नहीं मिलता। बलशेर ने बताया कि वे पांच दिन की दवा लेने गाजियाबाद से सुबह 6 बजे आए हैं। शाम से पहले दवा नहीं मिलेगी, क्योंकि यहां डाक्टर ही नहीं हैं। 100 रुपये की दवा के लिए मेरी पूरे दिन की दिहाड़ी चली जाएगी। पानी भी हमें खरीदकर पीना पड़ रहा है। यहां जितने मरीज आते हैं, सबको पता होता है कि सुबह से शाम होना तय है। इसलिए पुराने मरीज पूरा बोरिया-बिस्तर साथ लाते हैं। जो नये मरीज आते हैं, उनको धूल लगे फर्श पर ही बैठना पड़ता है।
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राधा ने बताया कि उसे थाइराइड है और वह यहां कई बार आ चुकी है। अस्पताल के नाम से ही डर लगता है। डाक्टरों का लंच भी लंबा चलता है। कई बार तो यहां पुलिस बुलाने की नौबत आ जाती है। कुछ लोग आते हैं तो उनका काम तुरंत हो जाता है। सामान्य लोगाें की कोई नहीं सुनता। अस्पताल के एक स्टाफ ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के चलते ज्यादा परेशानी हो रही है। एक डाक्टर रोज सैकड़ों मरीज देखता है। यहां ईएसआई के कार्ड होल्डर ज्यादा हैं, इसीलिए भीड़ ज्यादा होती है।
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