खुद को बेबस बताकर बच नहीं सकता हिमाचल : एनजीटी
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- संवेदनशील रोहतांग दर्रा के लिए तैयार कार्ययोजना पर जताई असंतुष्टि
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश में संवेदनशील रोहतांग दर्रा को लेकर तैयार की गई कार्ययोजना पर अंसतुष्टि जाहिर की है। एनजीटी ने पर्याप्त समय देने के बाद भी रिपोर्ट में कमियों को चिह्नित किया है। एनजीटी ने मामले में पर्यावरण विभाग के सचिव और शहरी विभाग के सचिव को अगली सुनवाई पर तलब किया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीती सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा था कि हिमाचल प्रदेश को मौजूदा पर्यावरणीय क्षति के कारण उपजी चुनौतियों को एनजीटी के आदेशों का पालन करना होगा। वह खुद को मजबूर बता कर बच नहीं सकता।
एनजीटी ने कहा था कि इस वक्त मौजूद पीढ़ी का दायित्व है कि वह नई पीढ़ी को बेहतर पर्यावरण सौंपे। लिहाजा 15 दिन में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तरीय अधिकारी के संज्ञान में तैयार की गई कार्ययोजना रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में सौंपे। पीठ ने स्पष्ट किया था कि रिपोर्ट में सभी विभागों के लिए चुने गए काम वर्गीकृत और स्पष्ट हों।
इन मुद्दों पर मांगी गई थी कार्ययोजना
हिमाचल सरकार को रोहतांग दर्रा के लिए रोपवे निर्माण और मढ़ी बाजार में पर्यावरण अनुकूल बाजार, चिकित्सकीय सुविधाएं, पुनर्वास योजना, नया ठोस कचरा प्लांट, मनाली में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, गुलाबा ब्यास नाला पर पार्किंग, गुलाबा चेक पोस्ट पर सोलर प्लांट, पौधारोपण, हेली टैक्सी सर्विस, इलेक्ट्रिक बसों का संचालन जैसे आदेशों के अनुपालन को लेकर तिमाही प्रगति रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में दाखिल करनी थी। एनजीटी ने इन्हीं मुद्दों पर कार्ययोजना रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया था। साथ ही चेताया था कि आधुनिक सुविधाओं के लिए पर्यावरण का नुकसान नहीं होना चाहिए। एनजीटी अब अगली सुनवाई 4 सितंबर को करेगा।
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