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Noida News: जिला बने बीत गए 27 साल, खेल सुविधाओं का आज भी बुरा हाल

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जिला बने बीत गए 27 साल, खेल सुविधाओं का आज भी बुरा हाल


खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग और तीनों प्राधिकरण पर खेल के उत्थान की जिम्मेदारी
27 साल बाद भी सरकारी एथलीट ट्रैक नहीं, संसाधन व कोच की कमी झेल रहे खिलाड़ी



माई सिटी रिपोर्टर

ग्रेटर नोएडा। यूपी के शो विंडो माने जाने वाले गौतमबुद्ध नगर को जिला बने 27 साल बीत गए लेकिन खेल के संसाधनों की कमी आज भी यहां के खिलाड़ी झेल रहे हैं। यहां अब तक खिलाड़ियों को सरकारी सिंथेटिक एथलीट ट्रैक नहीं मिल पाया है। सरकारी स्तर पर कोच की कमी भी पूरी नहीं हो पाई है। ये हाल तब है जब यहां खेल के उत्थान की जिम्मेदारी न केवल प्रशासन, खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग बल्कि जिले के नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण के कंधों पर भी है। प्राधिकरण के स्टेडियम में कुछ सुविधाएं हैं, लेकिन ये आम खिलाड़ियों की पहुंच से दूर हैं। मलकपुर स्टेडियम में पिछले कुछ वर्षों में सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास किए लेकिन दूर-दराज रहने वाले बच्चे यहां पहुंच नहीं पाते। पाइका योजना के अंतर्गत हर गांव में खेल के मैदान व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना भी परवान नहीं चढ़ पाई। खेल और युवा कल्याण विभाग के अधिकारी के पास सरकारी वाहन तक नहीं है। जिले में जब भी संसाधनों और खिलाड़ियों की उत्थान का मुद्दा उठाया जाता है तो जिम्मेदार एक दूसरे के पाले में गेंद डालते हैं। जिले में खेल प्रतिभाओं और जिम्मेदारों की तो भरमार है लेकिन कद्रदार की दरकार है। पेश है जेपी शर्मा की रिपोर्ट ...




सरकारी उदासीनता का उदाहरण हैं जिले की 200 निजी अकादमी
जिले में विभिन्न खेलों की लगभग 200 अकादमी संचालित हैं। सरकारी सुविधा व संसाधनों के अभाव में ही निजी अकादमियों की संख्या यहां दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। ये अकादमी अपने स्तर से खिलाड़ियों को तराशने का काम कर रही हैं। इनमें कुछ अकादमी को छोड़ दें तो अधिकांश अकादमी खिलाड़ियों के अभिभावक से शुल्क वसूलकर उन्हें प्रशिक्षण दे रही हैं। जिले में रहने वाले अधिकांश अभिभावक और उभरते हुए खिलाड़ी इनका शुल्क अदा करने में समर्थ नहीं हैं। इसके चलते न केवल प्रशिक्षण से वंचित रह जाते हैं बल्कि प्रतिभाएं निखरने से पहले ही दब जाती हैं।
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मलकपुर तक कैसे जाएं दूर गांव के खिलाड़ी
मलकपुर स्टेडियम की बात करें तो कोचों की कमी से निजात यहां भी नहीं मिल पाई है। यहां रेसलर के लिए मैट की व्यवस्था कर दी गई है, लेकिन कोच नहीं है। एथलीट ट्रैक नहीं होने से यहां जनपद स्तरीय प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को मिट्टी के ट्रैक पर ही दौड़ना पड़ा था। जेवर के गांव, नोएडा के छलेरा, छिजारसी और दादरी के जारचा के महावड़, बंबावड़, छपरौला, कचैड़ा आदि कई गांवों से इतनी दूरी है कि यहां के खिलाड़ी मलकपुर स्टेडियम में जाकर अभ्यास नहीं कर पाते और जो जाते हैं उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। आम अभिभावक बच्चों को किराये पर कमरा दिलाकर या किराया खर्च कर यहां नहीं भेज पाते।





जिले के खिलाड़ियों में दम, संसाधन हैं कम : चाचा हिंदुस्तानी

खेल प्रेमी सुभाष चंदेल उर्फ चाचा हिंदुस्तानी का कहना है कि जिले में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यहां के खिलाड़ियों में दम है, लेकिन संसाधन कम हैं। प्राधिकरण ने स्टेडियम के लिए जमीन अधिग्रहण करते समय किसान और स्थानीय निवासियों के बच्चों को खेल सुविधाएं देने का वादा किया था। मौजूदा समय में भी स्टेडियम में पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। जो सुविधाएं हैं, उनका शुल्क इतना अधिक है कि आम निवासी वहन नहीं कर सकता। सरकारी स्टेडियम में भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, खेल अधिकारी का भी पद खाली है। ये हाल तब है जब यहां तैनात रहे पूर्व जिलाधिकारी सुहास एलवाई खुद अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं।




राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी बड़े अफसर व जनप्रतिनिधि रूचि नहीं दिखाते, जबकि ऐसी प्रतियोगिता बड़ी संख्या में खिलाड़ियों का भविष्य व कॅरिअर बनाती हैं। आयोजन के बजट एकत्रित करने के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। - प्रमोद कुमार, यूपी ओलंपिक संघ
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खेल की जितनी सुविधाएं गौतमबुद्ध नगर में हैं, उतनी किसी अन्य जिले में नहीं हैं। यही कारण है कि जिले में खेलो इंडिया अंतर्गत प्रतियोगिताएं, हैंडबॉल, वेटलिफ्टिंग की एशियन चैंपियनशिप, बॉक्सिंग की दो राष्ट्रीय चैंपियनशिप कराई गईं। जिले में बॉस्केटबॉल की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं, 12 प्रतियोगिता जिला स्तर की हुई हैं। मलकपुर स्टेडियम में बॉस्केटबाॅल के सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण चल किया जा रहा है। - अनिता नागर, उप क्रीड़ा अधिकारी
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