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Noida News: दुर्लभ सिक्कों में कैद 2600 वर्षों का इतिहास और हजारों कहानियां

Sun, 21 Sep 2025 02:42 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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सैकड़ों संग्रहकर्ता देशभर से राजधानी के निरालानगर में लगी अवध सिक्का प्रदर्शनी में पहुंचे हैं।
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लखनऊ। किसी भी देश की मुद्रा उसकी आर्थिक समृद्धता का परिचायक होती है। समय के साथ ये मुद्राएं अपना स्वरूप बदलती रहती हैं और एक निश्चित समय के बाद चलन से बाहर भी हो जाती हैं। इन मुद्राओं, सिक्कों या नोटों की कीमत कई वर्षों बाद इनकी उपलब्धता और प्राचीनता के हिसाब से बढ़ती भी रहती है। ऐसी दुर्लभ मुद्राओं का संग्रह करने वालों की संख्या भी देश में बहुत है। ऐसे ही सैकड़ों संग्रहकर्ता देशभर से राजधानी के निरालानगर में लगी अवध सिक्का प्रदर्शनी में पहुंचे हैं। 2600 साल तक पुराने सिक्कों और मुद्राओं को देखना अपने आप में आश्चर्यजनक है। ये सिक्के न सिर्फ सैकड़ों वर्षों का इतिहास बयां करते हैं बल्कि इनके पीछे हजारों कहानियां भी छिपी हैं।
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अवध मुद्रा शास्त्रीय सोसायटी की ओर से निराला नगर में स्थित ऑफिसर्स कॉलोनी के समीप एक होटल में लगी इस तीन दिवसीय अवध सिक्का प्रदर्शनी में लाखों की तादाद में दुर्लभ सिक्के, मुद्राएं, बैंक नोट मौजूद हैं। मौर्य, कुषाण, गुप्त, मुगलकाल के अलावा अंग्रेजों के समय के सिक्कों का यहां अद्भुत संग्रह है। प्रदर्शनी में कुल 70 स्टॉल लगाए गए हैं जिनमें देशभर से करीब 400 मुद्रा संग्रहकर्ता शामिल हुए हैं। यहां मौजूद कई दुर्लभ सिक्कों की कीमत 10 लाख से लेकर करोड़ों रुपये तक है।

600-300 ईसा पूर्व का बेंट बार सिल्वर सिक्का, गुप्तकाल का गोल्ड सिक्का

दोनों की फोटो है- बंगलूरू से आए मरुधर आर्ट्स के चेयरमैन राजेंद्र मारू ने बताया कि उनके पास करीब 2600 साल पुराने सिक्के भी मौजूद हैं। हमारे पास गांधार का पौराणिक बेंट बार सिल्वर शतमान सिक्का (600-300 ईसा पूर्व) जिसका भार 10-11 ग्राम है। गांधार का ही कटोरे के आकार का चांदी का शतमान सिक्का (600-300 ईसा पूर्व) मौजूद है जिसका भार 1.5 ग्राम है। इसे भारत में प्रचलन में आने वाला पहला सिक्का माना जाता है।
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जहांगीर और नूरजहां काल के सोने की कीमत 1.5 करोड़
आयोजक सोसायटी के उपाध्यक्ष कपिल अग्रवाल ने बताया कि प्रदर्शनी में लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह के समय में चलने वाला 1852 का सिक्का भी मौजूद है। इसके अलावा जहांगीर और नूरजहां काल के दौरान चलने वाले सोने के एक सिक्के की कीमत इस समय डेढ़ करोड़ रुपये है। यहां मुगलकाल में चलने वाली दीनार और अशरफी भी मौजूद हैं। गुप्त काल के सिक्कों की कीमत भी तीन लाख रुपये से लेकर दो करोड़ रुपये तक है।

खरीदने से ज्यादा सिक्के और नोट बेचने पहुंचे लोग
प्रदर्शनी के दूसरे दिन भी जबरदस्त भीड़ उमड़ी। इस भीड़ को संभालने के लिए बाउंसरों को मोर्चा संभालना पड़ा। यहां न सिर्फ लखनऊ से बल्कि प्रदेश के दर्जनों जिलों व अन्य प्रदेशों से भी लोग सिक्के और नोट लेकर पहुंचे। खरीदने वालों से ज्यादा बेचने वालों की भीड़ जमा थी। कुछ लोग झोलों में भरकर पुराने सिक्के लेकर पहुंचे तो कई लोग बस दो-चार पुराने सिक्कों या नोटों के साथ घंटों स्टॉलों पर उन्हें अच्छे दामों पर बेचने के लिए जतन करते रहे।

अवध मुद्रा शास्त्रीय सोसायटी के अध्यक्ष रणविजय सिंह के अनुसार इस प्रदर्शनी में देशभर से जितने भी संग्रहकर्ता आए हैं, सभी एएसआई से लाइसेंस प्राप्त हैं। इनमें से ज्यादातर संग्रहकर्ता ऐसे हैं जिन्हें पुराने सिक्के और मुद्राएं अपने पूर्वजों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्राप्त होती रही हैं। कुछ ने बाद में इन्हें किसी न किसी से प्राप्त भी किया है।

सैकड़ों संग्रहकर्ता देशभर से राजधानी के निरालानगर में लगी अवध सिक्का प्रदर्शनी में पहुंचे हैं।

सैकड़ों संग्रहकर्ता देशभर से राजधानी के निरालानगर में लगी अवध सिक्का प्रदर्शनी में पहुंचे हैं।

सैकड़ों संग्रहकर्ता देशभर से राजधानी के निरालानगर में लगी अवध सिक्का प्रदर्शनी में पहुंचे हैं।

सैकड़ों संग्रहकर्ता देशभर से राजधानी के निरालानगर में लगी अवध सिक्का प्रदर्शनी में पहुंचे हैं।

सैकड़ों संग्रहकर्ता देशभर से राजधानी के निरालानगर में लगी अवध सिक्का प्रदर्शनी में पहुंचे हैं।

सैकड़ों संग्रहकर्ता देशभर से राजधानी के निरालानगर में लगी अवध सिक्का प्रदर्शनी में पहुंचे हैं।

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