- सीजेपी के प्रवक्ता ने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी का पत्र बताकर एक्स पर की पोस्ट
- प्रशासन ने किया खंडन, कहा डीएम का नहीं आदेश, सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाह
- पुलिस ने कहा कि त्रुटिपूर्ण नोटिस को किया जा चुका है निरस्त, जारी करने वालों पर चल रही जांच
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल होने वाले जीबीयू के छात्र अक्षत त्रिपाठी को शांति भंग का नोटिस जारी होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद जिलाधिकारी मेधा रूपम को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया। सीजेपी प्रवक्ता ने एक्स पर एक पोस्ट कर पुलिस के नोटिस को जिलाधिकारी की ओर जारी करार दिया। जिस पर प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेकर यह स्पष्ट किया है कि नोटिस उनका नहीं है और सोशल मीडिया पर अफवाह नहीं फैलाने की अपील की है। उधर पुलिस ने भी नोटिस को अपना बताकर कार्रवाई की जानकारी दी है।
प्रयागराज निवासी अक्षत त्रिपाठी को पुलिस कमिश्नरेट के ग्रेटर नोएडा जोन के कार्यपालक मजिस्ट्रेट-3 की तरफ से एक नोटिस जारी हुआ था। आरोप लगाया था कि वो सीजेपी के धरने में शामिल होने के लिए गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को उकसा रहे थे। उनके बीच सरकार विरोधी भ्रामक बातें फैला रहे थे। शिकायत थाना ईकोटेक-1 में तैनात उप निरीक्षक शिवा पांडेय ने अपनी आख्या दी। प्रभारी निरीक्षक थाना ईकोटेक-1 ने उसे आगे अग्रसारित कर दिया। उसके बाद मजिस्ट्रेट तृतीय की तरफ से छात्र को 5 लाख के मुचलके का नोटिस जारी किया गया। सोशल मीडिया पर सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने एक पोस्ट कर इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ बताया। हालांकि उन्होंने आदेश को गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी का करार दिया। विवाद बढ़ने पर पुलिस ने नोटिस वापस ले लिया लेकिन सीजेपी प्रवक्ता की पोस्ट के बाद से जिलाधिकारी को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। जबकि डीएम की इस कार्रवाई में कोई भूमिका नहीं है। प्रशासन ने डीएम को लेकर चल रही अफवाहों का खंडन किया और बताया कि कमिश्नरेट लागू होने के बाद से मजिस्ट्रेट पावर पुलिस के पास है। अक्षय त्रिपाठी के संबंध में डीएम ने कोई आदेश जारी नहीं किया है। सोशल मीडिया पर अफवाह नहीं फैलाने की अपील की है। कहा है कि तथ्यों की पुष्टि के बिना भ्रम नहीं फैलाएं।
पुलिस ने अपनी गलती पर सफाई
अक्षत त्रिपाठी के प्रकरण में पुलिस को भी सफाई देनी पड़ी है। कमिश्नरेट के मीडिया सेल की ओर से जारी सूचना के मुताबिक कार्यालय मजिस्ट्रेट-3 ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बंध पत्र जारी किया। चार सितंबर को जारी इस त्रुटिपूर्ण नोटिस को अगले दिन निरस्त कर दिया गया। मामले में नोटिस जारी करने और लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इसमें स्पष्ट किया गया कि जिले में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के कारण प्रश्नगत नोटिस कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय गौतमबुद्धनगर से जारी किया गया है। जिलाधिकारी का इस प्रकरण से कोई संबंध नहीं हैं।