अविश्वास प्रस्ताव पर अलग-अलग है
लोकसभा के पूर्व महासचिवों की राय
क्रासर -
- पीडीटी आचार्य ने कहा, हंगामा इसे स्वीकार करने की राह में बाधा नहीं होना चाहिए
- बाल शेखर बोले, शोरशराबे के बीच नोटिस पर आगे बढ़ने की व्यवहारिक दिक्कतें हैं
एजेंसी
नई दिल्ली।
हंगामे के बीच लोकसभा में पेश अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार किया जा सकता है या नहीं, इसे लेकर सदन के पूर्व महासचिवों की राय अलग-अलग है। एक का मानना है कि हंगामा इसे स्वीकार करने की राह में बाधा नहीं होना चाहिए। वहीं दो अन्य का विचार है कि हंगामे की वजह से नोटिस की कार्यवाही को आगे बढ़ाने में व्यवहारिक दिक्कतें आती हैं।
लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को दूसरे प्रस्तावों की तरह नहीं स्वीकारा जा सकता। यह एक विशेष प्रस्ताव होता है और स्पीकर को सिर्फ सदस्यों को नोटिस के बारे में सूचित करना होता है। अगर प्रस्ताव सही है और इसका दस्तावेजीकरण नियमों के तहत हुआ है तो स्पीकर इस पर कार्यवाही को आगे चला सकती हैं। अगर नोटिस नियमानुसार है तो सदन के शांत न होने पर भी स्पीकर प्रस्ताव स्वीकार कर सकती हैं। यह उनकी जिम्मेदारी है कि सदन को सुचारु बनाएं। जब 50 लोग इस प्रस्ताव का समर्थन कर देते हैं तो स्पीकर को सिर्फ तारीख और दिन तय करना होता कि इसे बहस के लिए कब लिया जा सकता है।
लेकिन एक अन्य महासचिव बाल शेखर ने कहा कि सदन में शोरशराबे के बीच नोटिस पर आगे बढ़ने की अपनी व्यवहारिक कठिनाइयां हैं। उन्होंने कहा, जब वोटिंग नहीं होती है, सिर्फ सिर गिन लिए जाते थे। तब दूसरा पक्ष आंकड़ों में गड़बड़ी कर सकता था। अगर सदस्य इसके पक्ष की बजाय इसके विरोध में खड़े हों तो। एक अन्य पूर्व महासचिव ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, मुख्य मुद्दा यह है कि अविश्वास प्रस्ताव को लेने समेत किसी भी एजेंडे से पहले सदन को सुचारु बनाया जाना चाहिए। इसमें कैसे समर्थकों, विरोधियों को गिना जाएगा।