पिरामिडों की पांचवीं संरचना के रहस्य से उठा पर्दा
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने तीन तकनीकों का इस्तेमाल करके पत्थरों में छिपा ‘शून्य’ खोजा
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
काहिरा। मिस्र के पिरामिड आज भी पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा रहस्य बने हुए हैं। दुनिया को अब तक इन पिरामिडों के बारे में सिर्फ चार संरचनाओं की जानकारी हो पायी है जिनमें से तीन संरचनाएं पूरी हैं और एक अधूरी है। वैज्ञानिकों ने अब तीन अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए पांचवीं संरचना का पता लगाया है। इससे पिरामिड में पत्थरों के भीतर छिपा हुआ ‘शून्य’ उजागर हो गया है, जो मोटेतौर पर स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी के समान 100 फुट लंबा है।
करीब 4,500 वर्षों से भी पुराने गीजा के ग्रेट पिरामिडों का रहस्य आज तक नहीं सुलझ पाया है। सिर्फ इसकी तीन पूरी संरचनाओं में राजा के कमरे, रानी के कमरे और इन्हें जोड़ने वाले नीचे की तरफ ढाल वाले गलियारे से ही पर्दा उठा है। इनके अलावा जमीन के नीचे चट्टान काटकर बनाए गए एक कमरे की अधूरी संरचना का रहस्य भी सुलझा लिया गया है। प्रसिद्ध जर्नल ‘नेचर’ में छपी शोध रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने तीन तरह की अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अब यहां गलियारे के समानांतर पांचवीं संरचना का रहस्य भी सुलझा लिया है।
यह पांचवीं संरचना लंबाई में पुराने गलियारे से छोटी है और इसकी ऊंचाई व चौड़ाई उसी गलियारे के समान है। वास्तुशिल्प के नजरिये से ये पिरामिड आज भी खुद में एक चमत्कार हैं। मात्र डेढ़ सौ वर्ष पूर्व ये पिरामिड पूरी दुनिया में मनुष्य निर्मित किसी भी ढांचे की तुलना में सबसे ऊंचे थे। इन पिरामिडों पर हुए शोध में पांचवीं संरचना से पर्दा उठने को वैज्ञानिक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। पार्टिकल भौतिकी से संबंधित तकनीक का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं की अंतरराष्ट्रीय टीम ने पांचवीं संरचना के लिए कॉस्मिक-किरणों के टकराव का इस्तेमाल किया।
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आसान हो सकेगा मानव कल्पना से
परे अद्भुत चमत्कारों को समझना
इस अध्ययन परियोजना के सह-निदेशक मेंहदी तायोबी ने अपने शोध से जुड़े निष्कर्ष में कहा है कि फिलहाल हम नहीं जानते हैं कि यह पांचवीं संरचना कोई सुरंग है या कोई बड़ी गैलरी है। इसीलिए हमने इसे ‘शून्य’ का नाम दिया है, क्योंकि अभी इससे जुड़े रहस्यों से पर्दा उठने पर ही कुछ कहा जा सकेगा। लेकिन इस शोध के बाद दुनिया के अद्भुत चमत्कारों को समझना आसान हो सकेगा जो मानव कल्पना से भी परे हैं।
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