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त्योहारों के मौसम में बढ़ा नकली दूध का धंधा

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त्योहारों के मौसम में बढ़ा नकली दूध का धंधा
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दर्जनों टैंकरों में भरकर नूंह से अन्य जिलों हो रही आपूर्ति, लोगों के स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़

यूनुस अलवी
पुन्हाना। त्योहारों को मौसम चरम पर है। कुछ दिनों में दिवाली आने वाली है जब मिठाईयों की खपत सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में जिले में रासायनिक उत्पादों द्वारा नकली दूध का धंधा करने वालों की पौ बारह हो रखी है। रासायनिक दूध का उत्पादन करने वालों को न ही लोगों के स्वास्थ्य की चिंता है और न प्रशासन का खौफ। उन्हें तो बस पैसे से मतलब है। रासायनिक दूध बनाने वाले माफिया स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये हर माह कमा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग केवल खानापूर्ति के लिए दुग्ध डेरियों पर छापामारी करता है।
पिछले वर्ष जिले के गांव मन्नाकी, नूंह शहर, पुन्हाना, नगीना, बड़कली, पिनगवां में दो दर्जन से अधिक ऐसी दुग्ध डेरियों पर स्वास्थ्य विभाग ने छापा मारा और सैकड़ों सैंपल भी लिये थे। उनकी गुणवत्ता जांच का रिपोर्ट क्या रहा, किन-किन धंधेबाजों पर कार्रवाई हुई यह आज तक पता नहीं चल पाया जबकि ऐसे कारोबारियों का ये गोरखधंधा आज भी धड़ल्ले से चल रहा है।
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नूंह में बनने वाले रासायनिक(कृत्रिम) दूध और दूध से बने पनीर, मावा, मिठाईयां धड़ल्ले से बाजार में बिक रही हैं। वहीं नकली दूध, मावा और पनीर दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, मथुरा, आगरा, फरीदाबाद आदि शहरों में भेजा जा रहा है। जिले में एक-दो जगह नहीं बल्कि अधिकतर गांवों में नकली दूध का कारोबार चल रहा है। इस कारोबार में जिले का दूधिया वर्ग पूरी तरह संलिप्त है। इनके पास इतना पैसा किस तरह से आया इसका जवाब लेने के लिए कभी भी आयकर विभाग ने छापा नहीं मारा।
गांव मन्नाकी के लोगों ने बताया कि उनके गांव में एक आदमी ने कुछ साल पहले भैंस वालों से दूध लेने का काम शुरू किया था। आज उसने गांव में दूध की डेयरी बना रखी है। डेयरी मालिक के पास शुद्ध दूध बहुत ही कम आता है लेकिन वह सोयाबीन का रिफाइंड तेल, यूरिया, पाउडर, मटराइल केमिकल, चूना सहित कई प्रकार के केमिकल को पानी या पनीर के खट्टे पानी से नकली दूध के करीब चार-पांच टैंकर तैयार करते हैं। गांव में नकली दूध का कारोबार करने वाले आदमी के खिलाफ लोग डीसी, सीएमओ, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय को वीडियो सीडी के साथ शिकायत कर चुके हैं। शिकायत के बाद 2 फरवरी 2017 को गांव की संदिग्ध डेयरी पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने छापा मारा था। इस दौरान 12 सैंपल भी लिए। नूंह में भारी मात्रा में सोयाबीन तेल से भरे टीन, सोडा, नमक पकड़ा और इस डेयरी मालिक ने बाकायदा एक लेबोरेट्री बना रखी थी।

कैसे बनता है सिंथेटिक दूध
आधा लीटर शुद्ध दूध और सोयाबीन रिफाइंड का आधा लीटर तेल मिक्सर से मिलाते हैं। यह फैट बनकर तैयार हो जाता है। गिरावटी के लिये थोड़ा नमक, चीनी(बूरा), यूरिया खाद और ग्लूकोज को पानी में मिलाते हैं। अगर गिरावटी कम रह जाती है तो उसमें एक अलग किस्म का रसायन मिलाते हैं। दूध में 23-24 गिरावटी होना जरूरी है। दूध का नंबर 50 से ऊपर पास हो जाता है लेकिन 65 से ऊपर का दूध शुद्ध माना जाता है। दूध में झाग लाने के लिये यूरिया खाद और इजी शैंपू का प्रयोग तक किया जाता है।

क्या कहते हैं दुध गद्दी के अध्यक्ष
दुग्ध गद्दी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य मोहन सिंह अहलूवालिया का कहना है कि नकली दूध बनाने के धंधे से सरकार जुड़ी हुई है। जिनसे नेता और अफसरों की जेबें गर्म होती है। आज देश में जितने दूध की सप्लाई हो रही है उसका 20 फीसदी भी पैदा नहीं हो रहा है। नकली दूध, घी और इससे बने उत्पादों के खिलाफ उन्होंने मुहिम चला रखी है। लिहाजा उन्हें आए दिन रास्ते से हटाने के लिए कई बार जान से मारने की धमकी मिल चुकी है और कई बार हमले भी हो चुके हैं।
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क्या कहते हैं सिविल सर्जन
नूंह के सिविल सर्जन राजीव बातिश का कहना है कि ऐसी संदिग्ध दूध डेरियों पर उनका विभाग समय-समय पर छापेमारी करता है। छापा मारकर सैंपल लिये जाते हैं जिनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाती है। लोगों की सूचना मिलने पर मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जल्द ही संदिग्ध डेरियों पर छापेमारी अभियान चलाया जाएगा।

गत वर्ष नूंह में एक दूग्ध डेरी पर की गई छापामारी के दौरान बरामद नकली दूध बनाने के सामान के फोटो-
फोटो--1 डेरी से एक टेंकर में दूध भरते हुऐ
फोटो -2 केमीकल पाउडर जो नकली दूध में मिलाया जाता है
फोटो -3 सोयाबीन तेल के खाली पडे टीन
फोटो -4 केमीकल को गर्म करते हुऐ
फोटो-5 सोयाबीन तेल से भरे टीन और आग पर गर्म होते तेल के डिब्बे
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