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मुकदमे बाजी में उलझ गई कोटला झील परियोजना

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मुकदमेबाजी में उलझ गई कोटला झील परियोजना
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- पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के सपने को कुछ किसानों की जिद ने दिया झटका
- 108 एकड़ में विकसित करने के लिए 81 करोड़ रुपये सरकार ने आवंटित कर दिए
शेरसिंह डागर
नूंह। जिले की तकदीर व तस्वीर बदलने के लिए शुरू की गई कोटला झील को विकसित करने की महत्वपूर्ण योजना कोर्ट केस के फेर में फंसकर रह र्गई है। इससे क्षेत्र को बढ़ा नुकसान होने के साथ-साथ यहां के विकास को भी धक्का लग रहा है, हालांकि योजना को सिरे चढ़ाने के लिए विभाग दूसरा रास्ता निकाल रहा है, लेकिन अभी उसमें भी कामयाबी नहीं मिली है। लिहाजा कोटला झील के विकसित होने से जो लोग पर्यटन स्थल, मछली उत्पादन व पेयजल आपूर्ति की जो उम्मीद लगाए बैठे थे, फिलहाल उस पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
नूंह जिले में कोटला झील के नाम से अरावली की पहाड़ी के साथ एक बड़ी झील है। यह झील करीब दो हजार एकड़ में हैं। लंबे समय से इसे विकसित करने की मांग चल रही थी, ताकि यहां एक बेहतर पर्यटन स्थल, मछली उत्पादन या फिर पेयजल व सिंचाई जैसी जरूरतों को पूरा किया जा सके। करीब पांच वर्ष पहले इस योजना को सरकार ने हरी झंडी दे दी। लेकिन सत्ता परिवर्तन होने के कारण किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया। वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभालते ही योजना को आगे बढ़ाते हुए मुआवजा दिया और इसे करीब 108 एकड़ में विकसित करने के लिए 81 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए।
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ये बना था स्वरूप
108 एकड़ में से 77 एकड़ जमीन को खोदकर और गहरा झील बना दिया गया है तथा करीब 23-24 एकड़ पर चारों तरफ से बांध बना दिया गया है। ये बांध ऊपर से इतना चौड़ा बनाया गया है कि इस पर आसानी से सड़क बनाकर वाहनों का आवागमन हो सकता है तो बराबर में झोपड़ी और बेंच लगाकर झील का आनंद लिया जा सकता है। खास बात यह है कि यह झील ऐसी है जिसके ओवरफ्लो होने पर पानी को पंप हाउस के जरिये पलवल जिले से गुजरने वाली जमुना में डाला जा सकता है तो वहां से पानी को वापस झील में लाया भी जा सकता है।
ये आ रही है रुकावट
झील से पंपहाउस की कुछ दूरी है। जिसमें कुछ ऐसे किसानों के खेत आ रहे हैं, जो अपनी जमीन को रास्ते के लिए नहीं दे रहे हैं। इस बात के लिए उन्होंने कोर्ट से स्टे लिया हुआ है। इसी कारण पिछले कई सालों से यह काम रुका हुआ है। हालांकि सिंचाई विभाग ने दूसरी तरफ से रास्ता बनाने की योजना बनाई है, लेकिन वो भी अभी सिरे नहीं चढ़ पाई है। ऐसे में यह महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटकी हुई है। जिससे क्षेत्र को नुकसान हो रहा है।
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यह परियोजना जिले के जीवन रेखा से जुड़ी हुई है। झील विकसित होती है तो यहां पर्यटन स्थल, पेयजल, सिंचाई सहित मछली उत्पादन का बड़े स्तर पर काम हो सकता है, लेकिन मामला कोर्ट में उलझा होने के कारण परियोजना अधर में है। विभाग की कोशिश है कि रास्ता दूसरी जगह से निकाला जाए।
- सुरेश कुमार, जेई सिंचाई विभाग।

फोटो- कोटला पंप हाउस।
- कोटला झील का मैप।
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