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सेक्टर संवाद: अरबों की जमीन पर कब्जा, प्राधिकरण बेखबर

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अमर उजाला सेक्टर संवाद
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हेडिंग: अरबों की खाली जमीन पर कब्जा, प्राधिकरण बेपरवाह
सबहेड: अतिक्रमण और कब्जे ने बिगाड़ दी सेक्टर-63 की सूरत, उद्यमियों में नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। राज्य सरकार नोएडा में औद्योगिक निवेश लाने का सपना देख रही है, लेकिन नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही सरकार की मंशा पर भारी पड़ती दिख रही है। कहने को नए उद्योग लगाने के लिए नोएडा में जमीन नहीं है, लेकिन औद्योगिक सेक्टरों में ही अरबों रुपये की खाली जमीन पर कब्जे और अतिक्रमण का जाल फैल रहा है। फेज-3 स्थित सेक्टर-63 के मौजूदा हालात प्राधिकरण की लापरवाही की पोल खोल रहे हैं।
शनिवार को अमर उजाला सेक्टर संवाद अभियान के दौरान उद्यमियों में प्राधिकरण के खिलाफ खासी नाराजगी दिखाई दी। नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (एनईए) के अध्यक्ष विपिन मल्हन ने बताया कि कब्जों ने जिस तरह सेक्टर की सूरत को बिगाड़कर रख दिया है, ऐसे हालात में यहां कोई निवेश भला क्यों करेगा। फेज-3 का सेक्टर-63 सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देता है। सबसे ज्यादा उद्योग और श्रमिक भी यहीं हैं, लेकिन इसके बाद भी 1200 से ज्यादा उद्योग सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। वहीं, उद्यमियों का कहना था कि प्राधिकरण के वाणिज्यिक भूखंडों पर अतिक्रमण और कब्जे की शिकायत लगातार प्राधिकरण अधिकारियों से की जा रही है, लेकिन सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी अनजान बैठे हैं। बड़े-बड़े खाली भूखंडों पर कबाड़ियों ने कब्जा जमा लिया है तो कहीं स्लम बन चुका है। ए और ई-ब्लॉक स्थित लंबे-चौड़े वाणिज्यिक भूखंडों पर अवैध रूप से टीन शेड डालकर कब्जे का खेल बिना प्राधिकरण की मिलीभगत से संभव नहीं है।
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...ऐसे तो बर्बाद हो जाएंगे उद्योग
अतिक्रमण से बदसूरती का शिकार हो रहे सेक्टर-63 के उद्योगों पर संकट मंडराने लगा है। विदेशों से आने वाले खरीदार भी अब यहां आने में कतराने लगे हैं, जिससे शहर के उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अतिक्रमण इस कदर बढ़ गया है कि इकाइयों में माल लाना तो दूर अंदर जाना भी मुश्किल हो जाता है। खानापूर्ति के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है, लेकिन फिर हालात जस के तस बन जाते हैं।
खाली भूखंड रद्द करने की मांग
मल्हन का कहना है कि सेक्टर में खाली भूखंडों को प्रयोग में लाया जाए। यदि आवंटन के बाद भी भूखंड लंबे समय से खाली हैं तो उनका आवंटन रद्द किया जाए। नोएडा प्राधिकरण ने जिस उद्देश्य से भूखंड छोड़े हुए हैं, उनके लिए बनाई गई योजनाओं को साकार किया जाना चाहिए, नहीं तो अवैध कब्जे भविष्य में प्राधिकरण के लिए ही मुसीबत बन जाएंगे।
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परिचर्चा
औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के दावे करने वाले प्राधिकरण की हकीकत जाननी है तो सेक्टर-63 के हालात देखे जा सकते हैं। छोटे से लेकर बड़े उद्योग तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं।
- राजन खुराना, कार्यकारी सदस्य-एनईए
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ऐसा नहीं कि प्राधिकरण के अधिकारी सेक्टर-63 की समस्याओं से अवगत नहीं हैं। उद्यमी सेक्टर की समस्याओं को लगातार अधिकारियों के सामने उठाते आ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।
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- अशोक गोयल, उद्यमी
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सेक्टर में अतिक्रमण से परेशान उद्यमी लंबे समय से आवाज बुलंद कर रहे हैं। प्राधिकरण के अधिकारी दौरा करते हैं। खानापूर्ति के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती है, लेकिन फिर हालात जस के तस बन जाते हैं।
-विकास बंसल, उद्यमी
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