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नोएडा-गुड़गांव में बढ़ रहे दिल्ली से डेढ़ गुना ज्यादा वाहन

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हेडिंग : नोएडा-गुरुग्राम में बढ़ रहे दिल्ली से डेढ़ गुना ज्यादा वाहन
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सबहेड: सेमिनार में ईपीसीए के चेयरमैन ने कहा, प्रदूषण की रोकथाम के लिए सार्वजनिक वाहनों का लोग करें उपयोग
नोएडा-ग्रेटर नोएडा की व्यवस्था से नाखुश दिखे ईपीसीए के चेयरमैन
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42 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों से बढ़ता है
30 प्रतिशत प्रदूषण उद्योगों से बढ़ता है
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। अगर दिल्ली में एक गाड़ी बढ़ रही है तो नोएडा और गुरुग्राम में तीन गाड़ियां बढ़ रही हैं यानी दिल्ली से नोएडा और गुरुग्राम में गाड़ियों की बढ़ने की रफ्तार डेढ़ गुना ज्यादा है। बढ़ती हुई गाड़ियों की संख्या हमारे लिए खतरनाक सिद्ध हो रही है। यह प्रदूषण बढ़ा रही हैं। ऐसी निजी गाड़ियों का प्रयोग बंद कर सार्वजनिक परिवहन के साधन अपनाने पर जोर देना होगा, तभी प्रदूषण घटेगा। यह कहना है ईपीसीए के चेयरमैन डॉ. भूरेलाल का। वह शुक्रवार को नोएडा सेक्टर-62 के नोएडा मैनेजमेंट एसोसिएशन के एक सेमिनार में प्रदूषण पर चर्चा के दौरान संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंसेज की स्टडी के मुताबिक 42 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों से बढ़ता है। 30 प्रतिशत प्रदूषण उद्योगों से बढ़ता है। इसके बाद थर्मल पावर प्लांट, घरों से निकलने वाले कचरे और सड़क पर उड़ रही धूल का नंबर प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों में आता है। लिहाजा, इसके उपाय के तहत बस सर्विस, कार पूलिंग, मेट्रो आदि का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही, प्रदूषण की रोकथाम के लिए अन्य उपाय करने होंगे। इसमें सोलर एनर्जी, ईको फ्रेंडली घर, एलईडी लाइटों का प्रयोग, फ्लोरसेंट लाइट, रिसाइकिल गारमेंट सहित कई अन्य वस्तुओं का प्रयोग करना होगा।
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औद्योगिक यूनिटों के बाहर खड़ी गाड़ियां बढ़ा रही परेशानी
भूरेलाल ने कहा कि घरों के बाहर गाड़ियां खड़ी न की जाएं। यही नहीं, नोएडा के औचक निरीक्षण के दौरान उन्हें हर औद्योगिक यूनिट के बाहर गाड़ियों का अंबार दिखा था। कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन प्राधिकरण कुछ नहीं कर रहा है। सड़क पर गाड़ियां खड़ी होने से जाम बढ़ रहा है, जो कहीं न कहीं प्रदूषण बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है।
सेक्टर-18 मार्केट से क्यों नहीं हट रहीं गाड़ियां
उन्होंने कहा कि सेक्टर-18 में तीन हजार गाड़ियों की क्षमता वाली पार्किंग है, लेकिन यहां के बाजारों से गाड़ियां नहीं हट रही हैं। पिछले दौरे में उन्होंने कहा था यहां केवल पैदल चलने वालों के लिए जोन बना दिया जाए। जिसे आना है वह पार्किंग में गाड़ी खड़ी करे और अट्टा और सेक्टर-18 में पैदल घूमे।
भगत सिंह पैदा तो हों लेकिन हमारे घर पर न हों
भूरेलाल ने कहा कि यहां लोगों की सोच यह है कि भगत सिंह पैदा तो हों, लेकिन हमारे घर न हों। इस तरह की सोच छोड़कर लोगों को खुद भी जागरूक होना होगा। हमें खुद कुछ बलिदान करने के लिए तैयार रहना चाहिए, ताकि हमारा वातावरण शुद्ध रह सके।
अब नहीं चल पाएगा प्राधिकरण का नाटक
भूरे लाल ने कहा कि पिछले दौरे के दौरान जब प्राधिकरण को पता चला कि मैं सेक्टर-18 में हूं तो वहां पानी का छिड़काव किया जाने लगा। इतना ज्यादा पानी बहाया गया, जिसकी जरूरत नहीं थी। इस प्रकार का ड्रामा नहीं चलेगा। जब बिना बताए मैंने नोएडा-ग्रेटर नोएडा में औचक निरीक्षण किया तो पाया कि यहां जगह-जगह प्लास्टिक के ढेर पड़े हुए हैं। जो खाली प्लॉट हैं, जहां निर्माण साइटों का मलबा डाला गया था, उसके ऊपर पानी के छिड़काव की व्यवस्था नहीं दिखी। नोएडा एक्सटेंशन खासकर बहुत सी बीमारियों का कारण बना हुआ है। नोएडा के पास भी अभी सी एंड वेस्ट प्लांट नहीं है। लिहाजा, ऐसे डंपिंग ग्राउंड को खत्म करना चाहिए। नोएडा में सार्वजनिक परिवहन के साधनों के तौर पर सीएनजी वाहनों को आगे बढ़ाना होगा। यही नहीं वैसे वाहनों की खरीद की अनुमति के लिए नियम बनाने होंगे, जिसके लिए पार्किंग की व्यवस्था हो।
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए माहौल सही हो
उन्होंने कहा कि वही उद्योग आगे बढ़ सकते हैं, जहां आसपास शुद्ध और साफ वातावरण हो। अगर आसपास गंदगी रहेगी और वातावरण में प्रदूषण रहेगा तो आप इंटरनेशनल मार्केट में बने नहीं रह सकते। लोग आपको रिजेक्ट कर देंगे। एक स्टडी के मुताबिक अगर पर्यावरण के संरक्षण में एक रुपये खर्च किया जाएगा तो तीन रुपये वापस आएंगे। वहीं, औद्योगिक यूनिटों से निकलने वाला कचरा लोगों की जिंदगियां लील रहा है। इससे बचाव के उपाय करने होंगे। यह ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकता। पराली से खाद बनानी चाहिए। पराली को खाद में बदलने के लिए सरकार की ओर से योजना चलाई जा रही है।
हमें जीवन शैली बदलनी होगी
हमें अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करना होगा। बीमारियों का खतरा बढ़ता है। बच्चों पर इसका बुरा असर हो रहा है। थर्मल पावर प्लांट पर रोक लगानी होगी। दादरी के प्लांट पर भी सोचना होगा। कोयले से चलने वाले प्लांट से प्रदूषण फैल रहा है। बिजली उपकरण भी प्रदूषण का कारण बन रहे हैं।
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गंगाजल भी हो चुका है प्रदूषित
उन्होंने कहा कि गंगाजल भी प्रदूषित हो चुका है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नगर निगम फेल है। दिल्ली में भी हालत ठीक नहीं है, लेकिन नोएडा की हालत भी कुछ ऐसी ही है। धूल, डंपिंग ग्राउंड और कूड़ा जलाने से प्रदूषण यह बढ़ रहा है।
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