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एक सिपाही पर 54 हजार वाहनों का बोझ

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हेडिंग: एक सिपाही पर 54 हजार वाहनों का बोझ
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सबहेड: नोएडा में लगातार बिगड़ रही यातायात व्यवस्था दे रही खतरे के संकेत
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200 से ज्यादा चौराहे हैं जिले में
28 सिपाही फिलहाल हैं मौजूद
15 लाख वाहन संभालते होते हैं
योगेश शर्मा
नोएडा। देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा की यातायात व्यवस्था दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। मानसून की मार से बेहाल शहर की सड़कों पर 15 लाख वाहनों का बोझ ट्रैफिक पुलिस के महज 28 सिपाहियों के कंधों पर है। औसत एक सिपाही पर 54 हजार वाहनों का बोझ है। लगातार बिगड़ रहे हालात आने वाले समय के लिए खतरे के संकेत दे रहे हैं, लेकिन सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है।
कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रहे नोएडा-ग्रेटर नोएडा की सड़कें वाहनों की भीड़ के आगे संकरी पड़ती दिखाई दे रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक पीक आवर में सड़कों पर करीब 15 लाख वाहन मूवमेंट करते हैं। इनमें 6.26 लाख वाहन नोएडा से रजिस्टर्ड हैं, बाकी दूसरे शहरों के वाहनों की आवाजाही होती है। इन्हें संभालने के लिए ट्रैफिक पुलिस के पास 100 से भी कम सिपाही हैं। लखनऊ में पीएम आने वाले हैं, इसलिए नोएडा ट्रैफिक पुलिस के 70 से ज्यादा सिपाहियों को लखनऊ भेज दिया गया है। महज 28 सिपाही इन दिनों सड़कें संभाल रहे हैं।
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हटाए गए ट्रैफिक मार्शल
नोएडा प्राधिकरण ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के नाम पर करीब 250 मार्शल दो महीने के लिए ट्रैफिक पुलिस को सुपुर्द किए थे, लेकिन इनकी सेवाएं महज डेढ़ महीने तक ही ली गईं। इन्हें ट्रैफिक पुलिस से वापस लिया गया है। हालांकि, इसके पीछे ट्रैफिक पुलिस को स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है।
सुनती नहीं सरकार
नोएडा ट्रैफिक पुलिस की तरफ से पुलिस महानिदेशालय को प्रस्ताव भेजकर 918 सिपाहियों की मांग की थी, जबकि 250 हेड कांस्टेबल मांगे थे। नोएडा, ग्रेटर नोएडा व देहात के लिए 3 ट्रैफिक इंस्पेक्टरों की मांग की गई थी, लेकिन महकमे ने सिपाही तो बढ़ाए नहीं, बल्कि इंस्पेक्टरों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी। ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर पहले 4 हुआ करते थे, लेकिन अब ये महज 2 ही रह गए हैं।
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ट्रैफिक पुलिस के पास पहले ही स्टाफ कम है। 70 से ज्यादा सिपाही लखनऊ सहित अन्य जिलों में वीआईपी ड्यूटी के लिए लगाए गए हैं। नोएडा प्राधिकरण ने ट्रैफिक मार्शल वापस ले लिए हैं। ऐसे में महज 28 सिपाहियों से शहर की यातायात व्यवस्था संभालने का काम लिया जा रहा है।
- अनिल कुमार झा, एसपी ट्रैफिक
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