फिरोजपुर झिरका। प्रदेश स्वास्थ्य विभाग भले ही सरकारी अस्पतालों के आधुनिकीकरण व उपचार के लिए नई-नई जांच मशीन प्रदान करने की बात करता हो, लेकिन फिरोजपुर झिरका में चल रहा सीएचसी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
सुविधाओं के अभाव में यहां के लोगों को मजबूरी में निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। नूंह को गुरुग्राम से अलग होकर जिला बने 12 साल हो चुके हैं लेकिन यहां के उपमंडल पर बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी बदतर है। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और एक्सरे मशीन से लेकर मरीजों के बैठने के लिए कुर्सी तक मौजूद नहीं है।
जिले के अंतिम छोर पर बसे उपमंडल फिरोजपुर झिरका में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बने सीएचसी पर आज तक एक्सरे मशीन नहीं लगाई गई है। यही नहीं, रोगियों को भिन्न-भिन्न बीमारियों के उपचार के लिए आवश्यक जांच भी 20 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल में करवानी पड़ती है।
ऐसे में 40 किलोमीटर क्षेत्र में फैले उपमंडल के 44 गांवों के 50 हजार लोगों को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मजबूरी में निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी से लोगों के स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यहां मरीजों और तीमारदारों को बैठने के लिए कुर्सी न रहने के कारण मजबूरी में फर्श पर बैठना पड़ता है। साथ ही अस्पताल में दवाई का मात्र एक काउंटर है, ऐसे में महिला रोगियों को अलग से दवाई लेने के लिए पुरुषों के साथ लाइन में खड़ा रहने पड़ता है।
बृहस्पतिवार को अस्पताल में उपचार कराने आई कोलगांव की सकीला, समीरी आदि ने बताया कि काफी दिनों से खांसी व जुकाम है। डॉक्टरों ने जांच के लिए जिला अस्पताल मांडीखेड़ा भेज दिया है। 20 किलोमीटर दूर दो रक्खी से आए फजरुद्दीन ने कहा कि अस्पताल के डॉक्टर छोटी-छोटी बीमारियों व आपातकालीन उपचार के लिए तुरंत दूसरे अस्पताल में रेफर करते हैं। इस अस्पताल में उपचार के नाम पर कुछ नहीं है।
नए भवन बनाने की राशि आ चुकी है, भवन बनने के बाद सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। - डॉ बातिश, जिला सिविल सर्जन