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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट---सब मिलकर करेंगे विस्थापित गांवों का विकास

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट

सब मिलकर करेंगे विस्थापित गांवों का विकास
या
सभी विभाग मिलकर बसाएंगे विस्थापितों का गांव
- कैबिनेट की बैठक में लिया गया फैसला

नंबर
1905 परिवारों का पुनर्वास और विस्थापन
1500 करोड़ रुपये खर्च का आकलन
1239 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण

अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए राज्य सरकार ने अहम फैसला लिया है। अब विस्थापित होने वाले 1905 परिवारों के पुनर्वास व विस्थापन का कार्य सभी विभाग मिलकर करेंगे। विकास कार्य कराने में करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन है।
दरअसल, जेवर एयरपोर्ट के लिए 1239 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। दयानतपुर (423 हेक्टेयर), रोही-पारोही (470 हेक्टेयर) व रन्हेरा (128 हेक्टेयर) गांव में सबसे अधिक जमीन ली जानी है। इसके अलावा बनवारीवास व किशोरपुर में भी जमीन अधिग्रहित होनी है। प्रथम चरण के अधिग्रहण में 116 हेक्टेयर ग्राम समाज की जमीन भी शामिल है। इन गांवों के करीब 1905 परिवार विस्थापित होंगे। उनके लिए पुनर्वास नीति को घोषणा पहले ही कर दी गई है। विस्थापित होने वाले प्रत्येक किसान परिवार को गांव में उनकी मौजूदा आबादी का 50 फीसदी भूखंड दिया जाना है। इन परिवार को भूखंड देने के लिए करीब 200 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी। इतनी जमीन खरीदने और उसे विकसित करने में करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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प्राधिकरण जितनी जमीन लेगा उसका 50 फीसदी हिस्सा विकास कार्यों में चली जाती है, जिनमें पार्क, सड़क, सीवर, बिजली लाइन, पेयजल पाइप लाइन आदि शामिल हैं। इसमें भी हरित पट्टी, स्कूल, मंदिर, बारात घर, स्वास्थ्य केंद्र आदि बनाने हैं। पुनर्वास के दौरान सभी खातेदारों को 5.85 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें पांच लाख रुपये नकद, नौकरी, 50 हजार रुपये प्रभावित परिवार को अपने सामान को नए जगह ले जाने, 10 हजार रुपये उन्हें घर खर्च के लिए और 25 हजार रुपये रोजगार शुरू करने के लिए दिए जाएंगे।
अब तक तय नहीं था कि विस्थापित जगह पर विकास किस तरह और कौन करेगा। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में यूपी कैबिनेट ने निर्णय लिया कि विकास कार्य सभी संबंधित विभाग मिलकर करेंगे। मसलन, परिषदीय विद्यालयों को बेसिक शिक्षा विभाग, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग रजवाहा, नाला व अन्य जल संसाधनों को विकसित करेगा। महिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग आंगनबाड़ी व बाल विकास परियोजना के कार्यालय व सह गोदाम की व्यवस्था करेगा। जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर विकास कार्य होंगे।

बैनामे से ली जा सकती है किसानों से जमीन
शासन ने एयरपोर्ट के लिए किसानों से जमीन सीधे बैनामे का भी अधिकार दे दिया है। हालांकि जिला प्रशासन ने इस बाबत कोई शासनादेश नहीं मिलने की बात कही है। इस बारे में नागरिक उड्डयन विभाग के विशेष सचिव एसपी गंगवार ने बताया कि अभी इस तरह का कोई शासनादेश नहीं जारी हुआ है।

मुआवजे की रकम पर भी कैबिनेट की मुहर
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की जमीन अधिग्रहण के लिए करीब 4000 करोड़ की दरकार है, जिसमें से 1500 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार को देने थे। हाल ही में यूपी कैबिनेट ने इस पर मंजूरी दे दी है। बाकी 2500 करोड़ में से नोएडा प्राधिकरण को 1500 करोड़ और ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण को 500-500 करोड़ रुपये देने हैं। इस पर तीनों प्राधिकरणों के बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है। जरूरत पर जारी होंगे। ये पैसे नियाल (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड) के खाते में जमा होंगे। नियाल ही पैसे जारी करेगा। सूत्रों का कहना है कि जमीन अधिग्रहित करने में पैसे का रोड़ा नहीं आएगा। किसानों से जमीन मिलने की देरी है।

नियाल को दिए अधिकार
यूपी कैबिनेट ने एयरपोर्ट को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने का अधिकार नियाल को सौंपा है। राज्य सरकार से अर्जित जमीन को लीज पर देने, एयरपोर्ट बनाने वाली कंपनी का चयन करने और प्रबंधन के लिए 90 साल का लाइसेंस देने की जिम्मेदारी भी नियाल को दी गई है। बिड डॉक्यूमेंट को कैबिनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी है। नियाल के सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह ने बताया कि एयरपोर्ट से संबंधित काम नियाल करेगी। सरकार ने कंपनी को इससे जुड़े कामों को करने के लिए अधिकार दे दिए। निविदा कंपनी से अनुबंध आदि का काम अब नियाल करेगी।
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दिसंबर अंत तक टेंडर संभव
यूपी कैबिनेट से बिड और कंशेसनायर डॉक्यूमेंट को मंजूरी मिलने से टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। इस पर अंतिम मुहर के लिए केंद्र को भेजा जाएगा। जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। धारा-11 लागू कर दी गई है। किसानों की आपत्तियों पर सुनवाई हो रही है।
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