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हेडिंग: यमुना एक्सप्रेसवे: चालकों से वसूला जाएगा ‘स्ट्रीट लाइट सेस’
सबहेड: 10 पैसे प्रति किलोमीटर सेस लेने की तैयारी, प्राप्त रकम से लगेगी स्ट्रीट लाइट
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए वाहन चालकों से सेस लिया जाएगा। टोल के शुल्क में टैक्स सेस की यह रकम भी जुड़ जाएगी। 10 पैसे प्रति किलोमीटर टोल टैक्स में वृद्धि की तैयारी है। यमुना प्राधिकरण के मुताबिक सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए एक किलोमीटर में 52 लाख रुपये खर्च होंगे। पूरे एक्सप्रेसवे में तीन चरणों में लगने वाली स्ट्रीट लाइट में कुल 91.36 करोड़ खर्च होंगे। इस रकम की रिकवरी के बाद यह सेस खत्म हो जाएगा।
दरअसल, यमुना एक्सप्रेसवे पर यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने बीते दिनों बैठक कर स्ट्रीट लाइट लगाने के निर्देश दिए थे। अब स्ट्रीट लाइट लगाने पर माथापच्ची शुरू हो गई है, लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत फंड की है। जेपी इंफ्राटेक ने यमुना प्राधिकरण को एक प्रस्ताव भेजा है। इसमें बताया गया है कि एक्सप्रेसवे बनाने के लिए हुए करार में स्ट्रीट लाइट लगाने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में स्ट्रीट लाइट सेस लगाकर पैसों का इंतजाम किया जाए। जेपी ने स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए 20 पैसे प्रति किमी सेस लगा दिया जाए, ताकि लाइट लगाने का काम शुरू हो सके। यमुना प्राधिकरण ने कंपनी के प्रस्ताव पर संशोधन किया है।
प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि 10 पैसे प्रति किलोमीटर सेस लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसका प्रस्ताव बनाकर चेयरमैन को भेजा गया है। प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। स्ट्रीट लाइट का पैसा वसूल होने के बाद यह सेस खत्म हो जाएगा। कुल 165 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर पहले चरण में 38 किमी में स्ट्रीट लाइट लगेंगी। इसमें 17.76 करोड़ का खर्च आएगा। दूसरे चरण में 57 किमी में काम होगा और इसमें 32.60 करोड़ खर्च होंगे। तीसरे चरण में 70 किमी में स्ट्रीट लाइट लगेगी जिसमें 41 करोड़ रुपये खर्च होंगे। लाइट सेस से आने वाला पैसा प्राधिकरण और एक्सप्रेसवे प्रबंधन के संयुक्त खाते में जमा होगा। प्राधिकरण की निगरानी में स्ट्रीट लाइट लगाने का काम होगा।
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यमुना एक्सप्रेसवे पर होगा 10 लाख तक का बीमा
ग्रेटर नोएडा। यीडा का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों का लगभग 10 लाख रुपये का चिकित्सा बीमा होगा। सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह का कहना है कि चिकित्सा बीमा के लिए इंश्योरेंस कंपनियों से बातचीत चल रही है। इसे जल्द ही फाइनल कर लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर एनएचएआई की गाइडलाइन में इस बात का जिक्र है कि एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों का बीमा होगा और एक्सप्रेसवे बनाने वाली एजेंसी इसका खर्च वहन करेगी तो वाहन चालकों से बीमा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। अगर उसकी गाइडलाइन में यह प्रावधान नहीं है तो वाहन चालकों से बीमा शुल्क लेना पड़ेगा। हालांकि, बहुत मामूली रकम होगी। टोल के साथ ले लिया जाएगा। वाहन चालकों पर कुछ खास बोझ नहीं पड़ेगा। बता दें कि सबसे पहले अमर उजाला ने बृहस्पतिवार की अंक में इस खबर को प्रकाशित किया था।