नशे की गिरफ्त में आ रहे नौनिहाल
- 13 वर्ष के बच्चों को भी अल्कोहल की लग गई है लत
- स्कूली बच्चों की बिगड़ती आदत को सुधारने में जुटे काउंसलर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नशे की गिरफ्त में लगातार आ रहे नौनिहालों की लत छुड़वाने सहित पढ़ाई के प्रति जागरूक करने के लिए दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(एसडीएमसी )की ओर से बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि मीठी सुपारी की आदत से शुरू होकर बच्चे थिनर, सिगरेट, बीड़ी, पान मसाला और अल्कोहल का भी सेवन कर रहे हैं। हालात पर काबू पाने के लिए काउंसलर की ओर से बच्चों को नशे से होने वाले नुकसान के प्रति आगाह करने के साथ-साथ पढ़ाई के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
काउंसलरों के मुताबिक, संगम विहार क्षेत्र के तीन स्कूलों में अब तक करीब 20 ऐसे मामले सामने आने के बाद बच्चों की काउंसलिंग की गई। उनका दावा है कि काउंसलिंग के बाद बच्चों की आदत में भी काफी सुधार आया है और अधिकतर बच्चों ने नशे का सेवन बंद कर दिया है। काउंसलर की कोशिश है कि बच्चे गलत आदत या लत का शिकार न हों ताकि उनकी सेहत और भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
- मीठी सुपारी की लत से अल्कोहल तक के शिकार
द्भकाउंसलर नीमा ने बताया कि तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट की आदतों के शिकार हुए कुछ बच्चे कूड़ा बीनने वालों के पास बैठकर अल्कोहल का सेवन करने से भी गुरेज नहीं करते। काउंसलर ने बताया कि इनमें से दो भाई ऐसे हैं, जिन्होंने पिता की दुकान से मीठी सुपारी खाने से शुरुआत की। फिर पान मसाला, बीड़ी, सिगरेट तक भी पहुंच गए। कुछ बच्चे सड़कों के इर्द-गिर्द फेंकी गई बोतल में बची बीयर का भी सेवन कर रहे हैं, जिन्हें जागरूक किया जा रहा है। ऐसे बच्चों की संख्या करीब 20 है, जिनकी काउंसलिंग के बाद आदतों में पूरी तरह बदलाव आया है।
- अभिभावक भी रखें बच्चों पर ध्यान
काउंसलर का कहना है कि कुछ बच्चे ऐसे हैं कि जिनके पिता की पान और तंबाकू बेचने की दुकान है तो कुछ बच्चे पड़ोस के किशोर को देखकर इन आदतों का शिकार हुए हैं। इसके लिए जरूरी है कि अभिभावक भी बच्चों के सामने ऐसा काम करने से बचें, जिससे उनकी आदत बिगड़ सकती है।
- कई तरह के नशीले पदार्थों का कर रहे हैं इस्तेमाल
काउंसलर ने बताया कि कई बार पारिवारिक परिस्थितियां ठीक न होने पर बच्चे घरों से बाहर अकेले होते हैं। ऐसे में बुरी आदतों की तरफ उनका ध्यान तुरंत चला जाता है। नशे का सेवन करने वाले कुछ बच्चे ऐसे हैं जो थिनर का भी इस्तेमाल करते हैं। इससे बच्चों की शारीरिक और मानसिक स्थिति भी खराब हो सकती है। दक्षिणी निगम के आयुक्त पुनीत कुमार गोयल ने भी माना कि स्कूलों में पांचवीं कक्षा तक के बच्चे भी नशे का शिकार हो रहे हैं। इनकी आदतों में सुधार कर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करने की काउंसलर्स को जिम्मेवारी सौंपी गई है।