नियमों को ताक पर रख
बढ़ रहा सिगरेट व्यापार
- नई कंपनियों ने पैर पसारे, डुप्लीकेट का धंधा भी जोरों पर
- पुरानी दिल्ली में सिगरेट का चल रहा ये व्यापार, सरकार ने नहीं ले रही संज्ञान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा) के तहत बीड़ी, सिगरेट और गुटखे पर वैधानिक चेतावनी के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी का आकार भले ही बढ़ा दिया हो, लेकिन देश की राजधानी में ही इन नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। पैकेट के 85 फीसदी हिस्से पर चित्रात्मक तस्वीरों के जरिये चेतावनी देना जरूरी है, लेकिन फिलहाल बाजार में मौजूद कई उत्पाद इन नियमों की पालना नहीं कर रहे।
बीते कुछ ही वर्षों में नई कंपनियों के इस कारोबार ने न सिर्फ तेजी से अपने पैर पसारे हैं, बल्कि इनकी डिमांड बढ़ने के बाद अब डुप्लीकेट उत्पादों की बिक्री भी बढ़ी है। डॉक्टरों की मानें तो सिगरेट, बीड़ी का सेवन करना सेहत के लिए अत्यंत खतरनाक है। ये उत्पाद कैंसर के साथ-साथ दिल और दिमाग का मरीज भी बना देते हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा घातक है इस जहरनुमा उत्पाद की डुप्लीकेट बिक्री। जानकारी के अनुसार पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार और चांदनी चौक जैसे इलाकों में इनका थोक व्यापार चल रहा है। दुकानों पर भी सामान्य रूप से ये उपलब्ध हैं। बावजूद इसके इन पर अब तक सरकारी महकमा रोक नहीं लगा सका है।
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. एसके अरोड़ा का कहना है कि सेक्शन 7 के तहत ये गैरकानूनी है। इसी वर्ष मार्च में देश की पहली छापामार कार्रवाई करते हुए करीब 10 लाख रुपये का मॉल जब्त किया गया था। इन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने, चावड़ी बाजार जैसे इलाकों में छापामार कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। इनके आयात पर रोक लगाने के लिए सीमा शुल्क विभाग से भी अपील की गई है। एक बार फिर इन विभागों को पत्र लिख इस गैरकानूनी अपराध को रोकने के लिए अपील करेंगे।
- अब तक नहीं दिख रहा हेल्पलाइन नंबर
इसी साल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोटपा एक्ट के तहत बीड़ी-सिगरेट जैसे उत्पाद के पैकेटों पर हेल्पलाइन नंबर सितंबर माह से प्रकाशित होने का प्रावधान किया था, लेकिन अभी तक कई कंपनियां इस नियम को पूरा नहीं कर रही हैं। पैकेट्स पर टोल-फ्री नंबर 1800-11-2356 दिखाई नहीं दे रहा है।