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जरी कारखाने से मुक्त कराने गई टीम पर हमला मामला-

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आप विधायक अमानतुल्लाह और एक अन्य पर चलेगा मुकदमा
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बाल मजदूरों को छुड़वाने गई टीम पर हमले का मामला
अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द किया

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। वर्ष 2010 में जरी कारखाने से बाल मजदूरों को मुक्त करवाने गए श्रम विभाग के अधिकारियों व एनजीओ की टीम को धमकाने व काम में बाधा पहुंचाने के मामले में आप विधायक अमानतुल्लाह खान व एक अन्य की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अदालत ने दोनों को इस आरोप से मुक्त करने संबंधी ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त साक्ष्य हैं।
विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने अपने फैसले में कहा कि विधायक और अन्य आरोपी सैफुल्लाह सिद्दीकी के खिलाफ अपहरण, धमकी व गंभीर रूप से चोट पहुंचाने के आरोप में अभियोग तय करने के साक्ष्य हैं।
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सत्र न्यायालय ने दोनों को बुधवार को अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया है, ताकि उनके खिलाफ अभियोग तय किए जा सकें। यह मामला 15 बाल मजदूरों को बटला हाउस, जामिया नगर से रिहा कराने से संबंधित है।
आरोप है कि खान और सिद्दीकी के नेतृत्व में भीड़ इकट्ठा हुई और बचाव टीम को मारने की धमकी दी और जबरन बच्चों को हटा दिया।
मजिस्ट्रेट अदालत ने आरोपियों को इस आधार पर आरोपमुक्त कर दिया था कि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के छह साल बाद वर्ष 2016 में चार्जशीट दायर की थी। अदालत ने कहा था कि आरोपपत्र तय समय सीमा के बाद दायर किया गया है।
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सत्र न्यायालय ने कहा कि इसमें दो राय नहीं है कि आरोपपत्र तय समय सीमा के बाद दायर किया गया, मगर यह देखना भी जरूरी है कि मामला 15 बच्चों से संबंधित है। इन बच्चों को आरोपियों ने विभाग की टीम से छीनकर वापस उसी काम में लगवा दिया था।
अदालत ने एनजीओ ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के सचिव राकेश सेंगर की याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया है।




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