जेएनयू में अनिवार्य हाजिरी का नियम न मानने पर सेवा नियमावली के तहत कार्रवाई की चेतावनी पर शिक्षक और विश्वविद्यालय प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। कैंपस में शिक्षक यूनियन के हंगामे के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने शांति बनाए रखने और कुलपति कार्यालय के नीचे हाईकोर्ट के आदेश के तहत धरना न देने की अपील की है। उधर, यूनियन का कहना है कि ठंड के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने भूख हड़ताल में बैठे शिक्षकों को कंबल या रजाई लाने की अनुमति नहीं दी है।
विश्वविद्यालय कैंपस में कुलपति कार्यालय के नीचे सोमवार सुबह शिक्षक यूनियन की 24 घंटे की भूख हड़ताल शुरू हो गई। दिनभर शिक्षक विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। यूनियन के विरोध धरने में वामपंथी संगठनों से जुड़े शिक्षक शामिल रहे। इसके अलावा छात्रसंघ व वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्र भी जुड़े।
शिक्षक यूनियन का कहना है कि कुलपति प्रो. एमजगदीश कुमार अपनी मर्जी से प्रस्ताव पास कर देते हैं, जबकि शिक्षकों से उक्त प्रस्ताव पर राय तक नहीं ली गई थी। सिर्फ मौखिक आधार के तहत शिक्षक कुलपति के नियमों को नहीं मान सकते। यदि ऐसा प्रस्ताव पास हुआ था तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं गई।
गौरतलब है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने यूजीसी नियमावली के तहत शिक्षकों और छात्रों की अनिवार्य हाजिरी कर रखी है। प्रशासन के बार-बार अनुरोध के बाद भी शिक्षक रजिस्टर में हाजिरी नहीं लगा रहे हैं। इसी के चलते रविवार को विश्वविद्यालय ने अनिवार्य हाजिरी नियम का पालन न करने वाले शिक्षकों को सेवा नियमावली के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके तहत नियम न मानने वाले शिक्षकों को वेतन रोकने के साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासन सेवा भी समाप्त कर सकता है।