हेराल्ड हाउस खाली करने के मामले में फैसला सुरक्षित
-सरकार ने दिया था 15 नवंबर तक खाली करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने हेराल्ड हाउस खाली करने के मामले में केंद्र सरकार व नेशनल हेराल्ड प्रकाशित करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। हाईकोर्ट ने फैसला आने तक केंद्र सरकार को आदेश प्रभावी न करने के लिए कहा है।
केंद्र सरकार ने लीज की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए हेराल्ड हाउस 15 नवंबर तक खाली करने का निर्देश 30 अक्तूबर 2018 को दिया था। एजेएल ने 12 नवंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी थी।
जस्टिस सुनील गौड़ के समक्ष सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एजेएल को समाचार पत्र प्रकाशन के लिए बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित जमीन लीज पर दी गई थी, लेकिन वहां पर 2008 से 2016 के बीच पत्र प्रकाशन बंद कर दिया गया । कंपनी ने इस भवन की तीन मंजिलें किराये पर दे दी थी, जिससे 15 करोड़ रुपये किराया मिल रहा था। यह लीज की शर्तों का उल्लंघन है इसलिए कंपनी को हेराल्ड हाउस खाली करने का आदेश दिया गया था।
केंद्र सरकार की ओर से मेहता ने कहा कि एजेएल ने कंपनी के 99 फीसदी शेयर यंग इंडियन में हिस्सेदार कांग्रेस से जुड़े चार लोगों के नाम ट्रांसफर कर दिए थे। इस तरह यह लोग एक तरह से एजेएल के मालिक बन गए थे। यंग इंडियन को एजेएल से 90 करोड़ की कर्ज वसूली का अधिकार 50 करोड़ रुपये में दे दिया गया था।
कोर्ट के समक्ष एजेएल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि केंद्र सरकार ने सबसे पहला नोटिस सितंबर 2016 में दिया था और उसके बाद अक्तूबर 2018 में इस मुद्दे को उठाया। इस तरह केंद्र सरकार करीब डेढ़ साल पूरी तरह खामोश रही। केंद्र सरकार ने पांच अप्रैल 2018 को नोटिस देकर कहा कि वह अपने 2016 के उस नोटिस की जांच करना चाहती है, जिसमें लीज की शर्तों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया था। सॉलीसीटर जनरल मेहता ने सिंघवी की दलीलों को खारिज करते कहा कि नेशनल हेराल्ड व दूसरे पत्रों का प्रकाशन केंद्र सरकार के नोटिस के बाद ही 2016 में दोबारा शुुरू किया गया था। प्रिटिंग प्रेस नहीं चल रही तो इसका मतलब यह नहीं है उसके भवन को दूसरी कंपनियों को किराये पर दे दिया जाए।