हाईकोर्ट ने स्पीड गवर्नर के मुद्दे पर सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली सरकार ने सभी व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर कर दिया था अनिवार्य
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। व्यावसायिक वाहनों में अनिवार्य रूप से स्पीड गवर्नर लगाये जाने संबंधी आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। सरकार ने व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य कर दिया था।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि व्यावसायिक वाहनों की श्रेणी में कौन-कौन से वाहन आते हैं। वह इस पर चार हफ्ते में जवाब दें। उसने सरकार से स्पीड गवर्नर नहीं लगाने वाले वाहनों के खिलाफ अगली सुनवाई तक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी की तारीख तय की है।
सरकार ने 17 जुलाई को अधिसूचना जारी कर सभी व्यावसायिक वाहन जैसे ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाले वाहन, इंटर स्टेट परमिट, नेशनल परमिट वाले वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य कर दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि यह नियम अक्टूबर 2015 से पहले खरीदे गए वाहनों पर लागू होगा। इस आदेश के बाद व्यावसायिक वाहनों की अधिकतम गति सीमा 80 किमी प्रति घंटा, खतरनाक सामान ले जाने वाले डंपर के लिए 60 किमी प्रति घंटा तथा स्कूल बस के लिए 40 किमी प्रति घंटा तय कर दी थी। एक संस्था कॉमर्शियल वेकिल वेलफेयर एसोसिएशन ने व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गर्वनर लगाने के आदेश को चुनौती दी है। उसने सरकार के इस अधिसूचना को असंवैधानिक एवं भेदभावपूर्ण बताकर निरस्त करने की मांग की है।