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युवक-युवतियां बड़ी संख्या में परिणय सूत्र में बंधे

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पांच हजार जोड़ों ने लिए शादी के फेरे
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दोवोत्थान एकादशी पर दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में युवा-युवतियां परिणय सूत्र में बंधे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सोमवार को देवोत्थान एकादशी से शादी-विवाह का सिलसिला भी शुरू हो गया। देवों की पूजा अर्चना के बाद एक बार फिर शादियां होनी शुरू हो गई है। एक आंकड़े के अनुसार देवोत्थान एकादशी पर दिल्ली-एनसीआर में करीब पांच हजार जोड़ों ने फेरे लिए। वैवाहिक स्थल में धूमधाम से शादी का आयोजन किया गया। दिल्ली के कई इलाकों में बैंड-बाजा बारात के साथ वैवाहिक स्थलों पर भीड़ जुटी। डोली सजा के रखना समेत कई गाने की धुन पर बाराती थिरकते नजर आए। वैवाहिक स्थलों, बैंक्वेट हॉल के सामने जबर्दस्त उत्साह देखने को मिला। नाच-गाने के साथ बारात वैवाहिक स्थल तक पहुंचा। पंडितों के अनुसार देवोत्थान एकादशी को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त होता है। इस दिन शादी-विवाह के लिए मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं होती है। यह दिन देवों का माना जाता है और इस दिन भगवान का दरबार खुलता है। इस कारण इस दिन मुहूर्त निकलवाए बगैर शादी किया जाता है। यही वजह है कि सैकड़ों युवक-युवतियां सोमवार को परिणय सूत्र में बंधें और गृहस्थ आश्रम की शुरुआत किए। देवोत्थान एकादशी के बाद कई सामाजिक व धार्मिक संगठन कई जगह गरीब कन्याओं का विवाह सामूहिक तौर पर भी कराने का सिलसिला शुरू करेंगे। उधर दिल्ली के मंदिरों में भी सुबह व शाम के वक्त भक्तों की भीड़ जुटी। बड़ी संख्या में श्रद्घालु मंदिर पहुंच कर भगवान की पूजा अर्चना किए। पंडित वृंदावन तिवारी के अनुसार मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु शालीग्राम रूप में तुलसी से विवाह करते हैं। इसी एकादशी से ही सारे मांगलिक कार्य मसलन विवाह, नामकरण, मुंडन, जनेऊ व गृह प्रवेश की शुरुआत हो जाती है।
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शालिग्राम विवाह का आयोजन किया
पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार इलाके में तुलसी व शालिग्राम विवाह का आयोजन किया गया। शिव शक्ति मंदिर यमुना विहार में देव प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर आयोजित विवाह कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्घालु पहुंचे। श्री राम हर्षण शांति कुज्ञ संस्था ने इसका आयोजन किया था। इस मौके पर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजेंद्र सिंह व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यमुना विहार विभाग के मीडिया समन्वय प्रमुख ताराचन्द उपाध्याय बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। इस अवसर पर आचार्य प्रभुनाथ पांडेय ने प्रवचन में कहा कि प्रसंगों के अनुसार वृंदा ने विष्णु को यह शाप दिया था कि तुमने मेरा सतीत्व भंग किया है। अत: तुम पत्थर के बनोगे। विष्णु बोले हे वृंदा यह तुम्हारे सतीत्व का ही फल है कि तुम तुलसी बनकर मेरे साथ ही रहोगी। जो मनुष्य तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगा, वह परम धाम को प्राप्त होगा। बिना तुलसी दल के शालिग्राम या विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है। शालिग्राम और तुलसी का विवाह भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के विवाह का प्रतीकात्मक विवाह है।
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