कुत्तों के डर से डंडे और पत्थर
साथ लेकर निकलते हैं लोग
- बिंदापुर में बढ़ रहे हैं कुत्ते के काटने के मामले
- रोजाना हो रही हैं घटनाएं, फिर भी निगम बेफिक्र
- स्थानीय लोगों का आरोप शिकायत के बाद भी नहीं होती कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तम नगर के बिंदापुर क्षेत्र में लावारिस कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग अब उनसे बचने के लिए घरों से डंडे और पत्थर लेकर निकलते हैं। डीडीए फ्लैट्स में रोजाना कुत्ते काटने के छह से आठ मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन इस हालात से आम लोगों को बचाने के लिए कोई माकूल इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। इसके बावजूद निगम की ओर से की जाने वाली कार्रवाई नाकाफी है।
महज 10 दिनों में ई ब्लॉक में महिला रतन को दूसरी बार रविवार को फिर से कुत्ते ने काट लिया। लेकिन क्षेत्र में कुत्ते काटने की समस्या से जूझ रहे सैकड़ों स्थानीय निवासियों की समस्या पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। बिंदापुर, उत्तम नगर, राजापुरी, द्वारका सहित दक्षिणी निगम के दर्जनों ऐसे क्षेत्र हैं, जहां कुत्ते के काटने की रोजाना शिकायतें मिलती हैं। निगम अधिकारियों का दावा है कि कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया चलती रहती है। डॉग बाइट की शिकायत मिलने पर ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रावधानों के तहत प्रयास किए जाते हैं।
एमसीडी के डॉ. आलोक के मुताबिक शिकायत मिलने पर कु त्तों का बंध्याकरण किया जा रहा है। लेकिन हालात में सुधार के बाद पांच दिनों में दोबारा उसी जगह पर छोड़ दिया जाता है। शिकायत मिलने पर दोबारा जांच करेंगे।
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स्कूली बच्चों के लिए भी संकट
क्षेत्र के बच्चों के लिए भी समस्या है। सुबह स्कूल जाने के दौरान डीडीए फ्लैट्स की गलियों से निकलना मुश्किल हो गया है। अगर स्कूल की कैब अंदर तक न पहुंचे तो बच्चों और अभिभावकों को भी कुत्तों का डर बना रहता है।
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हर वक्त चेहरे पर रहता है खौफ
हाथ में डंडा और चेहरे पर खौफ। शाम के बाद बिंदापुर की गलियों में कुछ ऐसा ही आलम रहता है। अगर, कुत्ते भौंक रहे हों और हाथों में बचाव के लिए कुछ न हो तो लोग सुरक्षित नहीं पहुंच सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बारे में पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी हैं, लेकिन निगम की ओर से माकूल इंतजाम नहीं किए गए।
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मुखर्जी नगर में भी बढ़ रही है समस्या
मुखर्जी नगर स्थित एसएफएस में भी कुछ ऐसा ही माहौल है। यहां करीब 400 फ्लैट हैं, लेकिन हर तरफ आवारा कुत्तों का खौफ है। निगम की ओर से की जा रही तमाम कोशिशों के बावजूद हालात में सुधार नहीं आया है।