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भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के साथ छठ महापर्व संपन्न

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उगते सूर्य को अर्घ्य देकर की सुख-समृद्धि की कामना
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सबहेड
- छठ महापर्व संपन्न, नदी, तालाबों नहरों पर बने घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ ने की पूजा-अर्चना

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लोक आस्था का महापर्व छठ उगते भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के नदी, तालाब, नहरों व सोसायटी में बने कृत्रिम तालाब के घाटों पर व्रतियों ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
छठ पर्व के चौथे यानि अंतिम दिन व्रतियों के साथ उनके परिजन सूप-दउरा में पूजा सामग्रियों को लेकर घाटों पर पहुंचे। व्रती कमर तक पानी में खड़े होकर उदयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। कई व्रती अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद से ही घाटों पर जमे रहे। दरअसल, मान्यता है कि जो व्रती शाम के अर्घ्य के बाद घाट पर समय गुजारते (अगोरते) है। उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। पूजा संपन्न होने के बाद व्रतियों ने समीप के मंदिर में भगवान शिव को जलाभिषेक कर व्रत का समापन किया।
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गाय के दूध से दिया अर्घ्य
सुबह घुटने तक पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य को व्रतियों ने अर्घ्य दिया तो उनके परिजनों ने व्रतियों के सूप व बांस की डलिया में लोटा में गाय का दूध लेकर अर्घ्य दिया। प्रकृति पूजन के महापर्व छठ के अवसर पर पूरी दिल्ली में धार्मिक श्रद्धा और उत्साह का माहौल दिखा।
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सोसायटी व मंदिरों के प्रांगण में भी मना पर्व
कई सोसायटियों में कृत्रिम तालाब बनाकर व्रतियों ने छठ पूजा की। इस दौरान कई मल्टीस्टोरी सोसायटी के स्विमिंग पुल में कमल व गुलाब के पंखुड़ियों को डालकर सुंदर बनाया गया था। यमुना घाट पर जहां व्रतियों ने पूजा-अर्चना की। वहीं, मुखर्जी नगर के सिग्नेचर व्यूह अपार्टमेंट में कृत्रिम तालाब में व्रतियों ने कमल-पुष्प वाले पानी में अर्घ्य दिया। पालम स्थित दादा देव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। इसी तरह, इंडिया गेट के पास कृत्रिम तालाब में लुटियन दिल्ली के आसपास के श्रद्घालुओं ने पूजा की।
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लोकगीतों की रही धूम
दिल्ली के घाट फूलों की सजावट के साथ बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था की गई थी। यमुना तट के किनारे दीप की जगमगाहट अलग छठा बिखेर रही थी। घाट लोकगीत से गुंजायमान हो रहे थे। कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
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