नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ का अध्यक्ष पद अब एबीवीपी के पास ही रहेगा। मंगलवार को डूसू चुनाव नतीजे घोषित होने के दो महीने पूरे हो रहे हैं। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार यह अवधि पूरे होने के बाद अब चुनाव नहीं हो सकेंगे। डूसू उपाध्यक्ष शक्ति सिंह जो कि एबीवीपी से हैं, वह ही अध्यक्ष सीट के लिए योग्य माने जाएंगे। दो माह की समयावधि खराब करने पर एनएसयूआई और आइसा ने प्रशासन पर इस मामले में जानबूझ कर देरी किए जाने का आरोप लगाया है। दोनों संगठनों का कहना है कि अध्यक्ष पद एबीवीपी के पास ही रहे, इसलिए हालात ऐसे किए गए।
उल्लेखनीय है कि यह पूरा मामला डूसू अध्यक्ष अंकिव बसोया की फर्जी डिग्री का हैै। संगठन इस मामले को लगातार लटकाए जाने का आरोप लगा रहे हैं। एनएसयूआई की राष्ट्रीय प्रभारी रुचि गुप्ता के अनुसार डीयू जैसे इतने बड़े विश्वविद्यालय में इस तरह से किया जा रहा है। अंकिव बसोया की फर्जी डिग्री मामले में तमिलनाडु विश्वविद्यालय की ओर से पहले ही बताया जा चुका है कि उनकी डिग्री फर्जी है और अंकिव उनके विश्वविद्यालय का छात्र नहीं है। इसके बाद भी डीयू ने उनकी डिग्री रद्द नहीं की और प्रशासन ने मामले को लटकाते-लटकाते दो माह बिता दिए।
मालूम हो कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार यदि डीयू प्रशासन अंकिव की डिग्री को फर्जी मानते हुए कार्रवाई करता तो उनकी उम्मीदवारी पहले ही समाप्त हो जाती। ऐसे में अध्यक्ष पद के लिए दुबारा चुनाव होने की संभावना थी। चूंकि अब दो माह की अवधि बीत गई है तो ऐसे में डूसू उपाध्यक्ष शक्ति सिंह को ही अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं कोर्ट में चल रहे अंकिव बसोया मामले में डीयू को अब 20 नवंबर का समय दिया गया है। पहले यह समय-सीमा 12 नवंबर थी। इतना समय बीत जाने के बाद भी डीयू के बुद्धिस्ट विभाग के अध्यक्ष प्रो. केटीएस सराव के नेतृत्व में बनी कमेटी अंकिव की डिग्री का सत्यापन नहीं कर सकी।
उल्लेखनीय है कि डीयू में 12 सितंबर को डूसू चुनाव हुए थे और 13 सितंबर को नतीजे देर रात घोषित किए गए थे। नतीजों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व संयुक्त सचिव की सीटों पर एबीवीपी ने जीत हासिल की थी। एनएसयूआई को केवल सचिव पद ही मिल पाया था। नतीजों में फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए एनएसयूआई ने नतीजों के बाद हंगामा भी किया था। हंगामे के चलते कुछ समय के लिए मतगणना को ही रोका गया था।