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स्टाफ कमी से तंग नर्सिंग यूनियन ने एलजी से लगाई गुहार

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स्टाफ कमी से तंग नर्सिंग यूनियन ने एलजी से लगाई गुहार
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- पांच वर्षों से नहीं हुई नई नियुक्ति, 75 नर्सिंग स्टाफ की तत्काल नियुक्ति की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। स्टाफ की कमी से जूझ रहे लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल की नर्सिंग यूनियन ने दिल्ली सरकार के बाद अब उपराज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई है। यूनियन की महासचिव शेरली रेजी ने कहा कि कर्मियों की कमी की वजह से काम को बोझ बढ़ रहा है, जिसका खामियाजा नर्सिंग स्टाफ को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे हालात में मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। कर्मियों की कमी वजह से अवकाश मिलने में भी दिक्कतें पेश आ रही है। अस्पताल में 2013 से कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है, नतीजतन नर्सिंग स्टाफ की कमी बनी हुई है। इस वजह से रोजाना प्रत्येक कर्मी 14-16 घंटे तक काम कर रहा है और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। यूनियन ने इसे लेकर उपराज्यपाल को पत्र लिखा है और तत्काल खाली पदों को भरने के साथ ही 75 नई नियुक्तियां करने की मांग की है। उपराज्यपाल को भेजे अपने पत्र में यूनियन की ओर से कहा गया है कि अस्पताल की क्षमता 19 विभागों में 100 बिस्तरों की है। लेकिन मरीजों की बढ़ती तादाद के कारण फिलहाल अस्पताल में बिस्तरों की संख्या 190 पहुंच चुकी है। इससे परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही है।
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घायल मरीज को नहीं मिली टेस्ट की सुविधा
नई दिल्ली। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीज के पैर से खून निकलता रहा, लेकिन राम मनोहर लोहिया अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में रात के वक्त डॉप्लर टेस्ट की अनुमति नहीं मिली। शनिवार देर रात सड़क हादसे का शिकार मरीज करीब चार घंटे तक परेशान रहा। आखिरकार घायल को एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। शनिवार रात करीब एक बजे चाणक्यपुरी क्षेत्र में हुए हादसे में पेशे से पत्रकार एक व्यक्ति गंभीर रूप से जख्मी हो गया। नाजुक हालत को देखते हुए उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल के इमरजेंसी में लाया गया, लेकिन एक्स रे में उसके पैर की हड्डी अलग होने की बात सामने आई। हादसा इतना भयानक था कि घायल के पैर की एक हड्डी का टुकड़ा शरीर से निकलकर बाहर गिर चुका था। इसी दौरान घायल की धमनी को हुए नुकसान का पता लगाने के लिए कार्डियोथोरेसिक वस्कुलर (सीटीवीएस ) विभाग भेजा गया, जहां काफी इंतजार के बाद डॉक्टर ने मरीज को डॉप्लर टेस्ट के लिए भेजा। लेकिन रेडियोलॉजी विभाग में मौजूद महिला डॉक्टर ने डॉप्लर ने यह कहकर मना कर दिया कि टेस्ट अब सोमवार को ही होगा। ब्यूरो
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ग्रीन कॉरिडोर से 3.28 मिनट में ले जाया गया हार्ट
नई दिल्ली। फोर्टिस हार्ट इंस्टीट्यूट के आग्रह पर एस्कॉट्र्स और अपोलो हॉस्पिटल के बीच एक ग्रीन कॉरिडेार बनाया गया। इस कॉरिडोर से महज 3.28 किलोमीटर की दूरी 3.6 मिनट में तय कर प्रत्यारोपण के लिए हार्ट ले जाया गया। हालांकि अपोलो के पास लीवर और किडनी है, जबकि कॉर्निया एम्स और दूसरी किडनी फोर्टिस, गुरुग्राम में जबकि हार्ट फोर्टिस एस्कॉट्स में हैं। ब्यूरो
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