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सेंट्रल पार्क में छाया जश्र-ए-विरासत उर्दू का जादू, चिश्ती बंधुओं और मुन्नवर मासूम ने बांधा समां

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जश्र-ए-विरासत उर्दू में चिश्ती बंधुओं और मुन्नवर ने बांधा समां
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- कार्यक्रम में दिनभर दिल्ली वालों ने उठाया उर्दू के दिलकश अंदाज का लुत्फ

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कनाट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में दिल्ली उर्दू अकादमी के सहयोग से आयोजित जश्र-ए-विरासत उर्दू के दूसरे दिन दिल्ली के निजामी चिश्ती बंधुओं ने महफिल-ए-कव्वाली में अपनी फनकार से दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं, मुंबई के मुन्नवर मासूम की कव्वाली ने कार्यक्रम में समां बांध दिया। उर्दू चाहने वाले दिल्ली वासियों ने दिनभर इस इस उत्सव का लुत्फ उठाया।
सेंट्रल पार्क में रविवार सुबह 10 उर्दू के इंटर के छात्रों ने उमंग पेंटिंग कॉम्पिटिशन से कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद टैलेंट ग्रुप ने किस्सा गोई पेश किया।
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दोपहर में दिल्ली के निजामी चिश्ती बंधुओं ने महफिल-ए-कव्वाली से समां बांध दिया। वहीं, उर्दू के इस उत्सव में शाहब खान ने शाम-ए-गजल ने उम्दा गजलों को पेश किया। शायरी के शौकीन दिल्ली वालों ने इस प्रस्तुति का आनंद उठाया। दिल्ली वासी इमरान सैनी ने बताया कि उन्हें यह कार्यक्रम बेहद पसंद आ रहा है। भागदौड़ की इस जिंदगी में उर्दू भाषा का प्रयोग खत्म होता जा रहा है। इसलिए ऐसे कार्यक्रमों से उर्दू की मिठास बरकरार रखने में मदद मिलेगी।
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इसके बाद दिल्ली की विंग कल्चर सोसाइटी ने दास्तान गोई में टोनी की दास्तान सुनाई। वहीं, सूफी सिंगर काबुकी खन्ना ने इंडियर ओपेरा फ्यूजन से दर्शकों को उर्दू भाषा की नई पेशकश से रूबरू करवाया। मुंबई की इंदिरा नायक ने सूफी महफिल जमाकर उत्सव में चार चांद लगा दिए। रविवार की आखिरी पेशकश में मुंबई के मुन्नवर मासूम की महफिल-ए-कव्वाली ने शायरी और गायकी के शौकीनों के दिलों को खुश कर दिया।
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