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फिर से खतरनाक होने लगी नोएडा-ग्रेटर नोएडा की हवा

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फिर से खतरनाक होने लगी नोएडा-ग्रेटर नोएडा की आबोहवा
- हवा में मौजूद खतरनाक कण (पीएम-10) का स्तर 235 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पहुंचा
- सड़क और निर्माणाधीन साइटों पर उड़ रही है धूल, जगह-जगह जलाया जा रहा है कचरा
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा।
मौसम में बदलाव के साथ ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा की हवा जहरीली होने लगी है। सोमवार को दोनों शहर का पर्टिकुलेट मैटर-10 (हवा में मौजूद सूक्ष्म कण) का स्तर 235 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंचा गया है, जो मध्यम श्रेणी (यलो जेान) में आता है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि सूरजपुर औद्योगिक क्षेत्र, ग्रेटर नोएडा, उद्योग विहार आदि जगह पर रात के समय कूड़ा जलाया जा रहा है। ग्रेनो वेस्ट और ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर धूल उड़ती रहती है। निर्माणाधीन और कच्चे रास्तों पर पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। इस कारण दोनों शहर में हर समय धुंध सी छाई रहती है। गौड़ चौक पर यह नजारा देखा जा सकता है। कच्चा रास्ता होने के कारण हर समय धूल उड़ती रहती है। वहां से गुजरने वालों को धूल में सांस लेना पड़ता है।
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पिछले साल सर्दी के मौसम में दिल्ली एनसीआर की हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया था। तब एनजीटी और सरकार ने कई ठोस कदम उठाए थे। ताकि, हवा को सांस लेने लायक बनाया जा सके। साथ ही अगली सर्दियों में इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इसकी तैयारी करने का भी आदेश दिया गया था, लेकिन जिले में इसे सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।

बारिश के मौसम में बेहतर थी शहर की हवा
बारिश के समय नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हवा काफी अच्छी थी। उस समय दोनों शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ग्रीन जोन (संतोषजनक) में पहुंच गया था। तब पर्टिकुलेट मैटर-10 (हवा में मौजूद खतरनाक कण) का स्तर 93 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया था।

शासन स्तर पर लटका हुआ है प्रस्ताव
पिछले साल सर्दियों में दिल्ली एनसीआर की हवा काफी प्रदूषित हो गई थी। उसके बाद एनजीटी ने रोकथाम के आदेश दिए थे। शासन के आदेश पर यूपीपीसीबी ने एक प्रस्ताव तैयार करके भेजा था। जिसमें प्रदूषण की रोकथाम के उपाय करने थे, लेकिन अभी तक प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं हो सका है।

छह श्रेणी में बांटा गया प्रदूषण का स्तर
प्रदूषण के वायु गुणवत्ता सूचकांक की छह श्रेणी हैं। पहली डार्क ग्रीन, दूसरी ग्रीन, तीसरी यलो, चौथी ऑरेंज, पांचवी रेड और छठी मैरुन है। डार्क ग्रीन अच्छी, ग्रीन संतोषजनक, यलो मध्यम, ऑरेंज में खराब, रेड में बहुत खराब और मैरुन सबसे खतरनाक स्तर होता है।
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कोट
प्रदूषण की रोकथाम के लिए कार्रवाई की जा रही है। सर्दी के मौसम में प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। उस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। - एके तिवारी, क्षेत्राधिकारी, यूपीपीसीबी
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