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अवसाद से मुक्ति दिलाएगी सरकार, ड्रग कंट्रोलर ने दी अनुमति

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अवसाद से मुक्ति दिलाएगी सरकार, ड्रग कंट्रोलर ने दी अनुमति
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-निमहंस के शोध के बाद मरीजों को मिल सकेगा लाभ, जागरूकता अभियान और इलाज पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। शोध संस्थान निमहंस द्वारा हाल ही में किए सर्वे के अनुसार भारत में हर 20 वां व्यक्ति अवसाद से ग्रस्त है। इस बीमारी के कारण मरीज घातक स्थिति में पहुंच सकता है जबकि ये बीमारी नियंत्रण के दायरे में ला जा सकती है। इसलिए केंद्र सरकार अब अवसाद को लेकर न सिर्फ जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दे रही है, बल्कि इसके इलाज पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ने मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (एमडीडी) से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए वोर्टिओक्सटीन की दवाओं को मंजूरी दे दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अवसाद जैसे मानसिक विकार उम्र, लिंग और जीवन स्तर के बावजूद हर किसी को प्रभावित करते हैं, लेकिन शोध से पता चला है कि आबादी के कुछ हिस्सों में अवसाद विशेष रूप से महिलाओं और शहर में रहने वालों में इसका जोखिम अधिक रहता है। शहरी आबादी में इसके उच्च प्रसार के लिए तेजी से विकसित जीवनशैली, तनाव, जीवन की जटिलताएं, आपसी सहयोग की कमी, आर्थिक अस्थिरता की चुनौतियां जैसे कई कारक हो सकते हैं।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (एमडीडी) एक जटिल मानसिक स्वास्थ्य बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में इससे लगभग 322 मिलियन लोग पीड़ित हैं। भारत में इससे 57 मिलियन लोग प्रभावित हैं। अवसाद और आत्महत्या एक-दूसरे से निकट संबंधित हैं। अवसाद की सबसे बुरी स्थिति में रोगी आत्महत्या भी कर सकता है। इसलिए इस बीमारी पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी है।
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