दो दिन की हड़ताल के बाद देर रात
मिला आंबेडकर अस्पताल में इलाज
- बुधवार को मारपीट के बाद से हड़ताल पर थे डॉक्टर
- रोहिणी के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल का मामला
- सुरक्षा गार्ड बढ़ाने, सीसीटीवी लगाने व सख्त कार्रवाई पर बनीं सहमति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रोहिणी के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में दो दिन से चल रही डॉक्टरों की हड़ताल शुक्रवार देर रात खत्म हो गई। हड़ताल की वजह से अस्पताल में उपचार न मिलने के कारण जहां मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी इलाज करने से हाथ पीछे खींच लिए। दिनभर ओपीडी में कमरा बंद कर वरिष्ठ डॉक्टर बैठे रहे, जबकि बाहर मरीजों का जमावड़ा लगा रहा। रात होते-होते अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टरों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने का निर्णय लिया, जिसके बाद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने का ऐलान कर दिया।
रोहिणी इलाके में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सबसे अधिक भीड़ आंबेडकर अस्पताल में होती है। रोजाना ओपीडी में हजारों की संख्या में मरीज आते हैं। वहीं, इमरजेंसी में 24 घंटे मरीजों का आना लगा रहता है। ऐसे में दो दिन से मेडिकल सुविधाएं न मिलने के कारण मरीज काफी परेशान रहे। यहां आने वाले मरीजों को बाबू जगजीवन राम, संजय गांधी और भगवान महावीर अस्पताल का रुख करना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को हो रही थी। शुक्रवार को दिनभर मरीज आते रहे, लेकिन हड़ताल की वजह से सुरक्षा गार्ड मेन गेट से ही मरीजों को लौटाता रहा।
डॉक्टरों की मांग थी कि अस्पताल में सुरक्षा गार्ड की संख्या दोगुनी की जाए, साथ ही अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए जाएं। डॉक्टर पर हमला न हो, इसके लिए आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी होना चाहिए। इस पर प्रबंधन ने सहमति जताई है।
दरअसल, बुधवार रात लेबर रूम में एक मरीज के तीमारदारों ने महिला डॉक्टर से हाथापाई की। डॉक्टर ने इसका विरोध किया तो तीमारदारों के साथ रिश्तेदार नर्सिंग अर्दली ने मिलकर डॉक्टर को अस्पताल की पार्किंग और उनके घर जाकर जान से मारने की धमकी दी। डॉक्टर ने इसकी शिकायत सीएमओ और पुलिस से की। पुलिस कार्रवाई में देरी के बाद गुस्साए डॉक्टरों ने इमरजेंसी और ओपीडी सेवाएं ठप कर दीं।