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नौ साल पुराने मामले से सांसद कठेरिया बरी
दिल्ली पुलिस ने 2009 में दर्ज किया था प्रदर्शन के दौरान संसद मार्च से रोकने का आदेश न मानने का केस
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। धरना-प्रदर्शन के दौरान सरकारी आदेश न मानने के नौ साल पुराने मामले में आरोपी आगरा से भाजपा के सांसद रामशंकर कठेरिया और अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने इनके खिलाफ 11 दिसंबर 2009 में मुकदमा दर्ज किया था। मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान संसद भवन की ओर मार्च से रोकने का पुलिस का आदेश न मानने से जुड़ा है।
पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी समर विशाल ने भाजपा सांसद, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महापौर नवीन जैन, विधायक उदयभान सिंह और एक अन्य व्यक्ति हर्षवर्धन दुबे को निषेधाज्ञा भंग करने के आरोपों से बरी कर दिया। कठेरिया राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष भी हैं। अदालत ने कहा कि पुलिस इनके खिलाफ आरोपों को साबित करने में नाकाम रही है। पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान रोके जाने पर हिंसात्मक व्यवहार किया गया, लेकिन इसका कोई ठोस साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं किया गया।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने और विरोध करने का अधिकार है। पुलिस को लगता है कि प्रदर्शनकारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर रहे हैं और उग्र हो रहे हैं तो उन पर बल प्रयोग कर सकती है। इससे पहले ऐसे लोगों को लाउडस्पीकर पर चेतावनी देना और हिंसक व्यवहार की वीडियोग्राफी कराना जरूरी है। पुलिस ने इस मामले में इन शर्तों का पालन नहीं किया। इससे पूर्व, दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में कहा था कि ये लोग 200-300 लोगों को लेकर जंतर-मंतर पर तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। संसद कूच से रोकने पर इन्होंने हिंसक व्यवहार करते हुये तोड़फोड़ की।